भोपाल । प्रदेश में 9 महीने बाद बजने वाले विधानसभा चुनाव के बिगुल से पहले मप्र में शिवराज मंत्रिमंडल में बड़ा उलटफेर होने की संभावना है। जिसमें आधे से ज्यादा मंत्री प्रभावित हो सकते हैं। कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव हो सकता है तो कुछ को बाहर भी होना पड़ सकता है। इसको लेकर पार्टी हाईकमान ने एक गोपनीय तौर पर सर्वे करा लिया है। जिसमें मंत्रियों के विभागों से लेकर उनके चुनाव क्षेत्र प्रभार के जिले और परिजनों के काम-धंधे भी शामिल हैं। खबर है कि मंत्रियों की ईमानदारी से जुड़ी यह रिपोर्ट राजनीतिक दलों के लिए सर्वे करने वाली एजेंसी ने तैयार की है। संभवत: इसी महीने या फिर फरवरी के शुरूआत में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार एवं फेरबदल में यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो सकती है।
दिल्ली सूत्रों के अनुसार भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी 16 एवं 17 जनवरी को प्रस्तावित है। इसी साल होने वाले 9 राज्यों के विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर यह बैठक अहम मानी जा रही है। बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारिणी एवं चुनाव वाले राज्यों के संगठन को लेकर भी फैसला होना है। जिन राज्यों में पार्टी की सरकार है उनको लेकर भी चर्चा होना संभावित है। दिल्ली सूत्रों से खबर है कि बैठक से पहले हाईकमान ने सभी राज्यों से संगठनात्मक एवं अन्य स्तर से जानकारी संककित है। जिसमें मप्र भी शामिल है। मप्र में मंत्रिमंडल का विस्तार संभावित है। नए चेहरे एवं विभागों में बदलाव का निर्णय भी दिल्ली से होना प्रस्तावित है। खबर है कि खराब परफार्मेंस या खराब छवि या विवादों में फंसे मंत्रियों हाईकमान निर्णय ले सकता है। इसको लेकर रिपोर्ट दिल्ली पहुंच गई है। बताया गया कि मप्र को लेकर रिपोर्ट तीन अलग-अलग माध्यमों से मंगाई गई है। भाजपा शासित अन्य राज्यों की रिपोर्ट भी इसी फार्मूले से तैयार कराई गई है। जिसमें सर्वे एजेंसी संगठन और राज्यों की सत्ता-संगठन के प्रमुख पदाधिकारी शामिल हैं।
हाल ही में विधानसभा सत्र के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पार्टी के सभी विधायकों से वन-टू-वन चर्चा की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत अन्य नेताओं से मुलाकात की है। इस मुलाकात को भी मप्र में निकट भविष्य में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार एवं अन्य प्रमुख निर्णयों से जोड़कर बताया जा रहा है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कल से इंदौर में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन में आना प्रस्तावित है। बताया गया कि यदि सियासी समीकरण सही रहे तो 15 जनवरी के बाद मंत्रिमंडल विस्तार समेत सरकार में अन्य नियुक्तियों पर फैसला लिया जा सकता है।
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