–माधव नेशनल पार्क से लगी अर्जुनगवां खदान के नाम पर अवैध उत्खनन
– मझेरा, मोरई, खेरोना, सफेदा रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में अवैध उत्खनन जोरों पर
शिवपुरी से रंजीत गुप्ता
शिवपुरी के माधव राष्ट्रीय उद्यान से लगी हुई अर्जुनगवां खदान क्षेत्र में स्वीकृत पत्थर की खदान के नाम पर रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में जमकर अवैध उत्खनन हो रहा है। अर्जुनगंवा से लगे हुए मझेरा, मोरई, खेरोना, सफेदा जो रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में आता है यहां पर जमकर अवैध उत्खनन जारी है। माईनिंग विभाग द्वारा अजुर्नगंवा के सरकारी सर्वे नंबर 1/3 रकवा 1.34 हेक्टेयर पर खदान स्वीकृत की है यहां पर स्वीकृति खदान एरिया की बजाए अर्जुनगंवा क्षेत्र से लगे वन क्षेत्र से माफियाओं द्वारा मिलीभगत से अवैध उत्खनन किया जा रहा है। यह पूरे खेल वन विभाग और माइनिंग विभाग के अफसरों की मिलीभगत से हो रहा है। यहां पर आकस्मिक छापामार कार्रवाई की जाए तो इस अवैध उत्खनन की पोल खुल जाएगी।
राजनीतिक संरक्षण में मिली अनुमति-
अर्जुनगंवा क्षेत्र में स्वीकृत नंबर पर खनन करने की बजाय पत्थर माफिया मझेरा, मोरई, खेरोना, सफेदा जो रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में आता है यहां पर अवैध उत्खनन कर रहे हैं। बताया जाता है कि अर्जुनगवां खदान क्षेत्र में खनन की स्वीकृति भोपाल से राजनीतिक संरक्षण के चलते स्थानीय अफसरों से सांठगांठ कर स्वीकृति दिलाई गई। अर्जुनगवां खदान क्षेत्र नेशनल पार्क के 2 किलोमीटर अंदर की इको सेंसेटिव जोन से लगा हुआ है यहां पर नेशलन पार्क एरिया में टाइगर लाने की योजना है लेकिन इसके बाद भी अर्जुनगवां क्षेत्र में पत्थर की उत्खनन की स्वीकृति प्रदान कर दी गई। यहां पर जिला प्रशासन के द्वारा खदान स्वीकृत करने का मामला भी सवालों के घेरे में है और अब यहां पर अवैध खनन रोकने में माईनिंग व वन विभाग नाकाम रहा है।

बड़ौदी क्षेत्र में पहुंच रहा है अवैध उत्खनन का पत्थर-
सूत्रों ने बताया है कि अर्जुनगंवा क्षेत्र के नाम पर मझेरा, मोरई, खेरोना, सफेदा से अवैध खनन करके पत्थर को बड़ौदी में स्थित स्टोन फैक्ट्रियों पर ले जाया जा रहा है। रॉयल्टी अर्जुनगंवा की होती है जबकि यह अवैध उत्खनन वन क्षेत्र से आता है। इस वन क्षेत्र वाले एरिया में काफी सफेद पत्थर है और यहां अवैध उत्खनन करके माफिया मनमानी कर रहे हैं। इन पत्थर माफियाओं पर वन विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। अवैध रूप से जो पत्थर दूसरे एरिया से आ रहा है उसे रोकने में माईनिंग विभाग भी असफल है। संबंधित एरिया में लगातार अवैध उत्खनन की शिकायतें सामने आ रही हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अवैध खनन का यह पत्थर चोरीछिपे बड़ौदा स्थिति फैक्ट्रियों पर पहुंचता है। रात के समय यहां पर ट्रैक्टर और मोटरसाइकिलों से यह पत्थर आ रहा है। इस अवैध उत्खनन से वन क्षेत्र को तो नुकसान हो ही रहा है साथ ही शासन को लाखों रुपए के राजस्व की हानि हो रही है।