सागर।निर्यापक मुनि श्री अभय सागर महाराज ने गुजरात में महुआ पारसनाथ की प्रतिमाओं की मनोरमता का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान की प्रतिमाओं के दर्शन से मन हर्षित हो जाता है। प्रतिमा की सुंदरता और मनोरमता श्रद्धालुओं के मन को आकर्षित करती है तथा भक्ति भाव जागृत करती है। इसी प्रकार सागर की मनोरमा कॉलोनी की मंदिर की प्रतिमाएं कॉलोनी के नाम के अनूरूप भव्य और मनोरम है
मुनि श्री प्रभात सागर महाराज ने कहा कि माता-पिता कभी नहीं चाहते कि उनके बच्चों को परेशानी हो। मोक्ष की प्राप्ति प्रत्येक व्यक्ति का लक्ष्य है, लेकिन इसके लिए त्याग और समर्पण आवश्यक है। साधु का सबसे बड़ा कार्य ज्ञान और ध्यान में लीन रहना है। भगवान की प्रशंसा से अधिक महत्वपूर्ण अपने पुण्य को बढ़ाना है, जिसके लिए विशेष बुद्धि नहीं, बल्कि सच्चे मन से समर्पण चाहिए।
मुनि श्री चंद्र सागर महाराज ने कहा कि त्याग कुछ दिनों या वर्षों का नहीं, बल्कि जीवनभर का होना चाहिए। साधु समाज को जैन धर्म के संस्कार और नियमों का पालन करना सिखाते हैं। त्याग व्यक्ति को ऊंचाइयों तक पहुंचाता है और जीवन को बेहतर बनाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार त्याग और संयम अपनाकर अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाना चाहिए।