सड़क नहीं होने से नंदोरा में 19 वर्षीय युवक की मौत का मामला, ग्रामीणों ने अम्बेडकर चौराहे पर किया प्रदर्शन
40 साल से सड़क का इंतजार, बारिश में घुटने तक कीचड़ से गुजरने को मजबूर ग्रामीण
अधिकारियों की समझाइश के बाद शव लेकर लौटे लोग
विजी लवानिया गौहरगंज।रायसेन
औबेदुल्लागंज जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम हर्रई के नंदोरा में सड़क की समस्या को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में करीब 40 वर्षों से पक्की सड़क नहीं बनी है। बारिश के दौरान रास्ते की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि लोगों को घुटने तक कीचड़ से होकर घर पहुंचना पड़ता है। इसी बीच 19 वर्षीय मोनू उइके की मौत के बाद ग्रामीणों ने मंगलवार को अम्बेडकर चौराहे पर धरना प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों के अनुसार मोनू उइके परिवार का इकलौता बेटा था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खराब और दुर्गम रास्ते के कारण समय पर मदद और आवागमन में परेशानी हुई। हालांकि मोनू की मौत का सड़क की स्थिति से प्रत्यक्ष संबंध आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है। मामले में ग्रामीणों ने सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जताई।
सोमवार को भी जनपद कार्यालय के सामने दिया था धरना
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर सोमवार को भी बड़ी संख्या में ग्रामीण जनपद पंचायत औबेदुल्लागंज पहुंचे थे। यहां उन्होंने जनपद पंचायत सीईओ के कार्यालय के सामने कई घंटे धरना दिया। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखना चाहते थे, लेकिन उनकी समस्या सुनने के लिए अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़क नहीं होने से सामान्य दिनों में भी परेशानी होती है, जबकि बारिश के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। बीमार व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं और आपात स्थिति में मरीजों को गांव से बाहर ले जाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

अम्बेडकर चौराहे पर घंटों बैठीं महिलाएं और ग्रामीण
मोनू की मौत के बाद मंगलवार को ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया। महिलाएं, बच्चे और ग्रामीण अम्बेडकर चौराहे पर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सड़क निर्माण और गांव की मूलभूत समस्याओं के तत्काल समाधान की मांग की।
मौके पर नायब तहसीलदार नीलेश सरबटे मौजूद रहे। बाद में एसडीएम चंद्रशेखर श्रीवास्तव और नवनियुक्त एसडीओपी डॉ. सलिल शर्मा ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाइश दी। अधिकारियों की समझाइश और आश्वासन के बाद ग्रामीण शव को ट्रैक्टर में लेकर वापस गांव की ओर रवाना हुए।

बारिश के बाद सड़क निर्माण का आश्वासन
ग्रामीणों के अनुसार अधिकारियों ने बारिश समाप्त होने के बाद सड़क निर्माण कराने का आश्वासन दिया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्थायी सड़क का निर्माण नहीं होता, तब तक तत्काल राहत के तौर पर रास्ते पर कोपरा, मुरम या अन्य वैकल्पिक सामग्री डलवाकर आवागमन योग्य बनाया जा सकता है।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि स्थायी सड़क निर्माण में समय लगना है तो फिलहाल अस्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है, ताकि बारिश के दौरान गांव का संपर्क पूरी तरह बाधित न हो।
गांव में कच्ची शराब की बिक्री की भी शिकायत
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने गांव में कथित रूप से कच्ची शराब की बिक्री होने की शिकायत भी अधिकारियों के सामने रखी। ग्रामीणों ने इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, स्वास्थ्य सुविधा, आवागमन और शराब जैसी समस्याओं के कारण गांव के लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब मोनू उइके की मौत के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।
फिलहाल ग्रामीणों को प्रशासन के आश्वासन के बाद धरने से हटाया गया है। अब देखना होगा कि बारिश के बाद सड़क निर्माण का आश्वासन कब तक अमल में आता है और तब तक ग्रामीणों के आवागमन के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है।