दो वर्ष से अधिक उम्र के आवेदनों के निरस्तीकरण से बढ़ी परेशानी, जरूरी काम हो रहे प्रभावित
सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
ज़िले की गैरतगंज तहसील क्षेत्र में दो वर्ष से अधिक आयु के लोगों के जन्म प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जाने से आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आवेदकों का कहना है कि जन्म प्रमाणपत्र नहीं बनने के कारण आधार कार्ड, छात्रवृत्ति सहित कई जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
तहसील क्षेत्र में जन्म प्रमाणपत्रों को डिजिटल रूप से तैयार करने की प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने के बाद बड़ी संख्या में लोग परेशान हैं। मंगलवार को ग्राम रसीदपुर निवासी प्रमोद कुमार अपनी पुत्री मुस्कान का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लोक सेवा केंद्र पहुंचे। यहां उन्हें बताया गया कि दो वर्ष से अधिक आयु होने के कारण आवेदन निरस्त किया जा रहा है और उन्हें निरस्तीकरण संबंधी पत्र सौंप दिया गया।
प्रमोद कुमार ने बताया कि उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ लोक सेवा केंद्र पर आवेदन जमा किया था। आवेदन प्रक्रिया में करीब 500 से 1000 रुपए खर्च होने के साथ उनका समय भी लगा, लेकिन इसके बावजूद जन्म प्रमाणपत्र जारी नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि उनकी पुत्री गढ़ी स्थित शासकीय स्कूल में अध्ययनरत है। छात्रवृत्ति और आधार कार्ड सहित अन्य जरूरी कार्यों के लिए जन्म प्रमाणपत्र की आवश्यकता है। प्रमाणपत्र नहीं बनने से इन कार्यों में परेशानी आ रही है।
प्रमोद कुमार ने बताया कि वे मजदूरी करते हैं। पत्नी की मृत्यु के बाद वे अपनी तीन बेटियों की जिम्मेदारी संभालते हुए मजदूरी कर उन्हें पढ़ा रहे हैं। उनका गांव गैरतगंज मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर है। ऐसे में बार-बार मुख्यालय और लोक सेवा केंद्र के चक्कर लगाने से उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी उठानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि आवेदन पर खर्च करने और समय लगाने के बाद भी प्रमाणपत्र नहीं मिलने से वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
इसी तरह तहसील क्षेत्र के कई अन्य आवेदक भी जन्म प्रमाणपत्र नहीं बनने से परेशान हैं। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से ऐसी व्यवस्था किए जाने की मांग की है, जिससे पात्र लोगों के जन्म प्रमाणपत्र आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद जारी हो सकें और उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
शासन के गजट नोटिफिकेशन के बाद प्रक्रिया में बदलाव
इस संबंध में तहसीलदार अमृता सुमन ने बताया कि शासन स्तर से गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद दो वर्ष से अधिक आयु के लोगों के जन्म प्रमाणपत्र बनाए जाने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। इसी के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार दो वर्ष से अधिक उम्र के आवेदनों पर प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं।
डिजिटल व्यवस्था के दौर में प्रमाणपत्र के लिए भटक रहे लोग
हैरत की बात है कि एक तरफ मध्यप्रदेश शासन सरकारी सेवाओं को डिजिटल और ऑनलाइन बनाने पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर जन्म प्रमाणपत्र जैसी मूलभूत और जरूरी दस्तावेजी सेवा के लिए आमजन परेशान हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना आसान नहीं है। मजदूरी करने वाले परिवारों को एक छोटे से दस्तावेज के लिए बार-बार 20-25 किलोमीटर दूर मुख्यालय तक आना पड़ रहा है। यदि किसी आवेदन में दस्तावेजों की कमी या कोई तकनीकी समस्या है तो उसे दूर करने का अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि पात्र लोगों को प्रमाणपत्र से वंचित न होना पड़े। शासन को इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, जिससे लोगों का समय और पैसा दोनों बच सकें तथा जरूरी दस्तावेजों के अभाव में बच्चों की पढ़ाई और अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ प्रभावित न हो।