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प्रो. विमलेन्द्र कुमार साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के नए कुलगुरु नियुक्त

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रायसेन।मध्य प्रदेश के राज्यपाल और कुलाधिपति श्री मंगुभाई पटेल ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पूर्व वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. विमलेन्द्र कुमार को सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय का कुलगुरु (कुलपति) नियुक्त किया है। प्रो. बिमलेन्द्र कुमार का कार्यकाल 4 वर्ष का होगा। 

प्रो. विमलेन्द्र कुमार देश-विदेश में पालि भाषा, बौद्ध दर्शन (विशेषकर अभिधम्म दर्शन) और तिब्बती बौद्ध धर्म के प्रख्यात विद्वान माने जाते हैं।

शिक्षा: प्रो विमलेन्द्र कुमार ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बौद्ध अध्ययन में एम.ए., एम.फिल. और पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने मगध विश्वविद्यालय (बोधगया) से पालि भाषा एवं साहित्य में भी प्रथम श्रेणी में एम.ए. किया है।

अकादमिक : प्रो कुमार ने करियर की शुरुआत विश्व भारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन में इंडो-तिब्बतन स्टडीज के व्याख्याता के रूप में की। वर्ष 1998 में वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से जुड़े और वहाँ पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग में लंबे समय तक सेवा दी। वे BHU में दो बार (2010-2013 और 2019-2022) विभागाध्यक्ष रहे और वरिष्ठ प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हुए।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व: सितंबर 2023 से दिसंबर 2024 तक उन्होंने लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय (नेपाल) में ‘ICCR डॉ. बी.आर. अंबेडकर चेयर ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज’ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

शोध एवं प्रकाशन: 

प्रो. कुमार ने अब तक संपादक के रूप में 19 पुस्तकों का प्रकाशन किया है और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में उनके 125 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। उनके निर्देशन में 35 से अधिक शोधार्थियों ने अपनी पीएच.डी. पूरी की है।

सम्मान एवं पुरस्कार: 

बौद्ध दर्शन और पालि भाषा में उनके विशेष योगदान के लिए वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा ‘विशेष पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। उन्हें ‘विद्वत भूषण सम्मान’ और ‘डॉ. भिक्षु धर्मरक्षित पालि सम्मान’ से भी नवाजा जा चुका है।

सांची विश्वविद्यालय परिवार ने प्रो. बिमलेन्द्र कुमार की इस नियुक्ति का स्वागत किया है। उनके विशाल अकादमिक अनुभव और बौद्ध अध्ययन में उनकी गहरी विशेषज्ञता से साँची विश्वविद्यालय को एक नई दिशा मिलने और भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के विस्तार की उम्मीद है।

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