Let’s travel together.

साँची विवि में मना भारतीय दार्शनिक दिवस

0 44

· सांँची विश्वविद्यालय और भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद का संयुक्त आयोजन

· ‘गुरुतत्व दर्शन’ विषय पर की गई गहन परिचर्चा

· ‘अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाता है गुरुतत्व

रायसेन।  सॉंची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में भारतीय दार्शनिक दिवस पर ‘गुरुतत्व दर्शन’ पर विशिष्ट व्याख्यान आयोजित हुआ। भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (ICPR), नई दिल्ली के सहयोग से हुए कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर विदिशा स्थित योगाश्रम की स्वामी डॉ. दीक्षानंद सरस्वती जी ने कहा कि गुरुतत्व अज्ञान से ज्ञान की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर लेकर जाता है। उन्होंने कहा कि आत्मा से जो विवेक जागृत होता है वही गुरुतत्व है जिसके लिए ज्ञान, कर्म और भक्ति का योग अर्थात संतुलन स्थापित करना होता है।

स्वामी दीक्षानंद ने कहा कि आज के दौर में गुरु बनने की होड़ है। हर जगह गुरु बन रहै हैं लेकिन वह व्यक्ति गुरु नहीं हो सकता जो बौद्धिक ज्ञान की बात तो करे लेकिन उसका आचरण विपरीत हो। उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रों से नियम से अभ्यास, अध्ययन करना, सोने से पहले ध्यान करना, आहार पर ध्यान देना और अपनी आध्यात्मिक यात्रा जारी रखने का आव्हान किया ही।

भोपाल स्थित सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी के रिसर्च, डेवलपमेंट एवं आयुर्वेद विभाग के अधिष्ठाता डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि गुरुतत्व प्रत्येक व्यक्ति के अंदर होता है। यह आत्मबोध का प्रेरक है और सत्य की ओर ले जाने वाला दिव्य तत्व है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूलाधार वेद हैं जिनमें आचार्य, ऋषि, उपदेशक इत्यादि के शब्द मिलते हैं लेकिन गुरु शब्द नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि गुरुतत्व मृत्यु से अमरत्व की ओर, असत्य से सत्य की ओर लेकर जाता है। डॉ. अखिलेश ने शिक्षक और गुरु के बीच अंतर बताते हुए कहा कि शिक्षक शिक्षा देता है जबकि गुरु व्यक्तित्व का निर्माण करता है। गुरु व्यक्ति नहीं तत्व है, चेतना है, आत्म प्रकाश का आश्रय है और गुरु संस्कार दाता है। उन्होंने कहा कि आज का दौर आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस का है। आर्टिफीशिल इंटेलिजेंस ज्ञान तो दे सकता है लेकिन व्यक्तित्व का निर्माण नहीं कर सकता।

व्याख्यान में आमंत्रित सागर विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. अरूण कुमार साव ने कहा कि गुरुतत्व को जानने और साधने की कला गुरु ही सिखाता है। अनगढ़ को सुगढ़ बनाने का काम करता है और संसार रूपी समस्याओं का वैद्य है। गुरु की गोद में सृष्टि और प्रलय खेलती है। आचार्य अपने आचरण से शिक्षा देता है। उन्होंने कहा कि गुरु की खोज में न निकलें बल्कि ईश्वर को तलाशें और अपने अंदर की खामियों का पता चलते ही उसे दूर करने की कोशिश ही व्यक्ति की आध्यात्मिक यात्रा होती है।

आभार प्रदर्शन करते हुए योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र बाबू खत्री ने बताया कि भगवान बुद्ध कहते थे कि अपना दीपक स्वयं बनें। अपने अंदर ही गुरु को तलाशें। गुरुतत्व दर्शन के केंद्र में सदैव शिष्य होता है। कार्यक्रम के संयोजक डॉ श्याम गणपत तिखे ने सभी व्यवस्थाओं के लिए आभार जताते हुए कहा कि हमारे भीतर बैठे सदगुरु को जागृत करें जिससे ज्ञान का प्रकाश पैदा हो सके।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

जन विश्वास अभियान के तहत दीवानगंज बी-पैक्स का निरीक्षण, किसानों से सीधे लिया फीडबैक     |     जनहित के मुद्दों पर कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा से रानी सौरभ जैन ने की चर्चा     |     सांची में श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व की धूम     |     सांची ओवरब्रिज में जगह-जगह गड्ढे, बारिश का पानी भी भराया     |     यूपीआई पर एमडीआर लोगों की ‘भुगतान स्वतंत्रता’ का हरण तो नहीं? -अजय बोकिल     |     देहरी खेड़ापति हनुमान मंदिर में आज मनाई जाएगी राधारानी जन्माष्टमी     |     रायसेन दरगाह शरीफ पर उर्स की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने की बैठक     |     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस पर नगर परिषद, जनप्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया श्रमदान     |     राधा अष्टमी पर श्रीजी मंदिर में गूंजेंगे राधा-कृष्ण के भजन, प्राकट्य महोत्सव पर भजन संध्या का आयोजन     |     मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के अंतर्गत एसडीएम ने सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं,विभिन्न संस्थाओं का किया निरीक्षण     |    

Don`t copy text!
पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करें- 9425036811