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79 साल बाद भी सड़क का इंतजार: टपरा गांव के ग्रामीण दलदल से गुजरने को मजबूर

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बच्चों की पढ़ाई और मरीजों की जान पर संकट

1.5 कच्चे रास्ते ने बढ़ाई मुश्किलें, 30-35 छात्र रोज कीचड़ पार कर स्कूल पहुंचते हैं; ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की लगाई गुहार

मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन 

सांची विकासखंड की ग्राम पंचायत जमुनिया के टपरा गांव में आजादी के 79 वर्ष बाद भी पक्की सड़क का सपना अधूरा है। बारिश शुरू होते ही गांव तक जाने वाला करीब डेढ़ किलोमीटर का कच्चा रास्ता दलदल में बदल जाता है। इससे ग्रामीणों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और संबंधित अधिकारियों से सड़क निर्माण की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गांव के पुरुषोत्तम शर्मा, भवानी प्रसाद, कामता प्रसाद, चंद्रभान शर्मा और सीताराम शर्मा ने बताया कि वर्षों से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, जबकि सड़क आज तक नहीं बन सकी। बारिश के मौसम में हमारे गांव के कई बच्चे पैदल चलकर पढ़ने के लिए जमुनिय और दीवानगंजा जाते हैं जिससे उनके कपड़े और बस्ते खराब हो जाते हैं। वहीं

राम सिंह, भोले राम, महाराज सिंह, मंजीत सिंह और गोलू ठाकुर ने कहा कि आसपास के अधिकांश गांवों में पक्की सड़क बन चुकी है, लेकिन टपरा गांव आज भी उपेक्षित है। प्रधानमंत्री सड़क योजना और मुख्यमंत्री सड़क योजना जैसी योजनाएं चलने के बावजूद उनके गांव तक सड़क नहीं पहुंची है। ग्रामीणों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए भोपाल-विदिशा हाईवे-18 तक पहुंचने के लिए दलदल भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है।

ग्रामीण भूरेलाल, जगदीश शर्मा, रामस्वरूप शर्मा, मल्लू शर्मा, काना शर्मा, ज्ञान सिंह ठाकुर और भूरा ठाकुर ने बताया कि बारिश के दौरान यदि कोई व्यक्ति बीमार हो जाए या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो तो स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। कीचड़ और दलदल के कारण समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। जिससे इन पर जान पर बन आती है

स्कूली छात्र आयुष और शरीक ने बताया कि वे रोज टपरा से जमुनिया पढ़ने जाते हैं। रास्ते में कीचड़ होने से कपड़े गंदे हो जाते हैं और रोज घर लौटकर उन्हें साफ करना पड़ता है। वहीं छात्राएं आस्था, काजल और पिहो ने बताया कि कच्चे रास्ते के कारण उन्हें स्कूल के लिए दो घंटे पहले घर से निकलना पड़ता है। कई बच्चे कीचड़ की वजह से स्कूल ही नहीं जा पाते। कभी-कभी तो बच्चों को लौटाने में देर शाम हो जाती है जिससे परिजन चिंता में पड़ जाते हैं।

जनपद सदस्य भंवरी गुलशन लोधी ने बताया कि टपरा गांव से प्रतिदिन 30 से 35 बच्चे जमुनिया, दीवानगंज हायर सेकेंडरी स्कूल और अन्य विद्यालयों में पढ़ने जाते हैं। बारिश के समय यह रास्ता पूरी तरह कीचड़ में बदल जाता है, जिससे बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि टपरा गांव तक शीघ्र पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।

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