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बड़ी खबर::जबलपुर बरगी क्रूज हादसे की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन, तीन महीने में देनी होगी विस्तृत रिपोर्ट

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तारकेश्वर शर्मा 

मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुए चर्चित बरगी क्रूज हादसे को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इस हादसे के बाद उठ रहे सवालों, लोगों के गुस्से और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर लग रहे आरोपों के बीच अब राज्य सरकार ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है। सरकार ने इस हादसे की तह तक पहुंचने और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए न्यायिक आयोग का गठन कर दिया है। आयोग को निर्देश दिए गए हैं कि वह पूरे मामले की विस्तृत जांच कर तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपे।

बरगी बांध और उससे जुड़ा पर्यटन क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश का बड़ा आकर्षण बनकर उभरा है। यहां हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। क्रूज और बोटिंग की सुविधाओं ने इस इलाके को और भी लोकप्रिय बना दिया था। लेकिन हाल ही में हुए इस हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। हादसे के बाद से लगातार यह सवाल उठ रहा था कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई और सुरक्षा व्यवस्था में कमी कहां रह गई।

बताया जा रहा है कि हादसे के समय क्रूज में बड़ी संख्या में पर्यटक मौजूद थे। अचानक तकनीकी गड़बड़ी और व्यवस्थाओं में आई कमी के कारण अफरा-तफरी मच गई। कई लोगों ने जान बचाने के लिए चीख-पुकार शुरू कर दी। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार कुछ समय तक राहत और बचाव कार्य भी सही तरीके से नहीं हो सका, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई। हादसे के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

इसी बीच सरकार पर भी दबाव बढ़ता गया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने सवाल उठाए कि क्या पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित रह गई है।

इन सब परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने न्यायिक आयोग गठित करने का फैसला लिया। यह आयोग हादसे के हर पहलू की बारीकी से जांच करेगा। आयोग यह पता लगाएगा कि हादसे के पीछे तकनीकी खराबी थी, मानवीय लापरवाही थी या सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई थी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्रूज संचालन के दौरान तय नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

आयोग के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि आखिर हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है। क्या क्रूज संचालक संस्था ने सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया? क्या संबंधित विभागों ने समय पर निरीक्षण नहीं किया? क्या यात्रियों की संख्या तय सीमा से अधिक थी? क्या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम मौजूद थे? ऐसे तमाम बिंदुओं पर आयोग विस्तार से जांच करेगा।

सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री स्तर पर भी इस घटना को गंभीरता से लिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आयोग को हर जरूरी दस्तावेज और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए ताकि जांच में किसी प्रकार की बाधा न आए।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी काफी आक्रोश देखने को मिला। लोगों का कहना है कि बरगी जैसे पर्यटन स्थलों पर लगातार भीड़ बढ़ रही है लेकिन सुरक्षा के इंतजाम उसी गति से मजबूत नहीं किए गए। कई लोगों ने आरोप लगाया कि लाइफ जैकेट, इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम और बचाव संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। यदि समय रहते सुरक्षा मानकों पर ध्यान दिया गया होता तो स्थिति इतनी भयावह नहीं बनती।

विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन स्थलों पर जल परिवहन से जुड़ी गतिविधियों में सुरक्षा सबसे अहम पहलू होती है। किसी भी क्रूज या बोट संचालन से पहले तकनीकी परीक्षण, मौसम की जानकारी, यात्रियों की संख्या और इमरजेंसी प्रोटोकॉल की जांच अनिवार्य होती है। यदि इनमें जरा भी लापरवाही हो तो बड़ा हादसा हो सकता है। बरगी हादसे ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या पर्यटन विकास के साथ सुरक्षा मानकों को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है या नहीं।

न्यायिक आयोग की रिपोर्ट आने के बाद कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं पर कार्रवाई हो सकती है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नए दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा काफी गरमा गया है। विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग कर रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और पूरी पारदर्शिता के साथ जांच कराई जाएगी।

बरगी क्रूज हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि पर्यटन सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। अब पूरे प्रदेश की नजर न्यायिक आयोग की जांच पर टिकी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि इस जांच से सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

फिलहाल सरकार ने आयोग को तीन महीने की समयसीमा दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में आयोग गवाहों के बयान, तकनीकी रिपोर्ट, प्रशासनिक दस्तावेज और घटनास्थल का निरीक्षण कर अपनी जांच आगे बढ़ाएगा। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और आखिर इस हादसे की असली वजह क्या थी।

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