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अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव “सिनेब्रेशन” में ‘जामगढ़ – श्री कृष्ण की ससुराल’ डॉक्यूमेंट्री को मिला द्वितीय स्थान

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भोपाल।माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव सिनेब्रेशन 3.0 – 2026 में “जामगढ़ – श्री कृष्ण की ससुराल” डॉक्यूमेंट्री फिल्म को डॉक्यूमेंट्री श्रेणी में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। इस अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में कुल 67 फिल्मों का चयन किया गया था, जिनमें से 25 श्रेष्ठ फिल्मों को स्क्रीनिंग के लिए चुना गया। इन चयनित फिल्मों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए इस डॉक्यूमेंट्री ने बेस्ट डॉक्यूमेंट्री श्रेणी में द्वितीय स्थान प्राप्त कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु, विजय मोहन तिवारी अभिनेता अजय पाल एवं फिल्म महोत्सव समिति के पदाधिकारियों एवं अतिथियों द्वारा निर्देशक सुनील सोन्हिया को सम्मानित किया गया।

फिल्म के निर्देशक सुनील सोन्हिया ने बताया है कि ऐसी डॉक्यूमेंट्री केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि समाज को अपनी जड़ों, संस्कृति और इतिहास से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। वहीं सह निर्देशक विवेक शर्मा का मानना है कि भारत की कई ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहरें आज भी लोगों की जानकारी से दूर हैं, जिन्हें डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के माध्यम से देश और दुनिया के सामने लाना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी संस्कृति और विरासत को पहचान सके।

इस डॉक्यूमेंट्री का निर्माण प्रतिमा सांस्कृतिक समिति एवं प्रतिमा फिल्म्स एंड इवेंट द्वारा किया गया है। फिल्म की टीम में निर्देशक सुनील सोन्हिया, सह निर्देशक विवेक शर्मा,सिनेमेटोग्राफर- एडीटर अंकित मैथिल,पटकथा लेखन – सत्यनारायण याज्वल्क्य, कलाकार सत्या डांस ग्रुप- गाडरवारा विशेष आभार – श्री कृष्ण पायेय, मार्गदर्शक माननीय नरेंद्र शिवाजी पटेल (मंत्री, म.प्र. शासन) का विशेष योगदान रहा।
उल्लेखनीय है कि “जामगढ़ – श्री कृष्ण की ससुराल” डॉक्यूमेंट्री को इससे पहले खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025 में भी राजा बुंदेला द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग 29 मार्च 2026 को नागपुर फिल्म फेस्टिवल में भी की जाएगी, जहां देश-विदेश के फिल्म निर्माता, कलाकार और कला प्रेमी इस फिल्म को देख सकेंगे।

यह डॉक्यूमेंट्री भारतीय संस्कृति, लोक परंपरा, प्राचीन कला, पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक धरोहरों को दर्शाती है, जिससे जामगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है। यह फिल्म भारतीय विरासत को संरक्षित और प्रचारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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