-3 किलोमीटर मार्ग पर 4 दिन में चार बड़े हादसे
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल-विदिशा हाईवे-18 पर स्थित बालमपुर घाटी अब वाहन चालकों के लिए खौफ का पर्याय बनती जा रही है। यहां दुर्घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। हर दो-चार दिन में होने वाले हादसों ने राहगीरों और वाहन चालकों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटी की अत्यधिक ऊंचाई, तीखी चढ़ाई-उतराई और सड़क के दोनों ओर 10 से 20 फीट गहरी खाई होने के कारण यह क्षेत्र लगातार हादसों का केंद्र बना हुआ है।
ताजा हादसा शनिवार-रविवार की दरमियानी रात सामने आया, जब सागर से खंडवा जा रही बोलेरो पिकअप क्रमांक एमपी-68-जेडडी-9172 बालमपुर घाटी की चढ़ाई चढ़ते समय अचानक पीछे रिवर्स होने लगी और करीब 10 फीट गहरी खाई में जा गिरी। गनीमत रही कि उस समय वाहन के पीछे कोई अन्य वाहन नहीं चल रहा था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। दुर्घटना में चालक को मामूली चोटें आईं। घटना की कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार घाटी पर भारी वाहनों के बीच चढ़ाई में रुक जाने और पीछे लुढ़कने की घटनाएं आम हो गई हैं। कई बार ट्रक बीच सड़क पर खड़े हो जाते हैं, जिससे लंबा जाम लग जाता है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
तीन किलोमीटर के दायरे में चार दिन में चार बड़े हादसे
चिंता की बात यह है कि बालमपुर-दीवानगंज क्षेत्र के करीब तीन किलोमीटर के दायरे में पिछले चार दिनों के भीतर यह चौथा बड़ा सड़क हादसा है। इससे पहले एक बोलेरो पिकअप एंबुलेंस से टकराकर पलट गई थी। वहीं ट्रक, ऑटो और बस की भिड़ंत में दो लोग घायल हो गए थे। लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं ने हाईवे-18 की सुरक्षा व्यवस्था और सड़क की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
18 महीने में 200 से अधिक हादसे, 38 लोगों की मौत
ग्रामीणों के अनुसार भोपाल-विदिशा हाईवे-18 पर पिछले 18 महीनों में 200 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 38 लोगों की मौत हुई है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इसके बावजूद हाईवे के चौड़ीकरण और फोरलेन निर्माण की मांग वर्षों से अधूरी पड़ी हुई है।
100 से अधिक गांवों में आक्रोश
हाईवे-18 से जुड़े 100 से अधिक गांवों के ग्रामीण लंबे समय से इस मार्ग को फोरलेन किए जाने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों भारी और व्यावसायिक वाहन गुजरते हैं, जिनसे लाखों रुपये का राजस्व और टैक्स प्राप्त होता है, लेकिन सड़क सुरक्षा और चौड़ीकरण की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा।
ग्रामीणों ने शासन, प्रशासन और संबंधित विभागों से बालमपुर घाटी सहित पूरे हाईवे-18 के ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने, क्रैश बैरियर लगाने, चेतावनी संकेतक स्थापित करने तथा हाईवे को शीघ्र फोरलेन करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो दुर्घटनाओं का यह सिलसिला और अधिक जानलेवा साबित हो सकता है।