सागर। संसार में चार प्रकार की गतियां होती हैं चारों गतियां में यदि मंदिर बनवाने, मूर्तियां विराजमान करने और अन्य प्रकार से दान करने का अवसर मिलता है वह मनुष्य गति होती है अन्य गतियों में दान करने का अवसर नहीं मिलता है यह बात मुनि श्री महासागर महाराज ने भाग्योदय रोड पर स्थित आईटीआई के सामने श्री अर्हतकूट जैन मंदिर शिलान्यास समारोह में कहीं।
उन्होंने कहा कि आपको मनुष्य गति प्राप्त हुई है दान के लिए उदारता बरते जीवन भर आपको पुण्य मिलने वाला है। दानवीर चामुंडा राय का नाम आज भी जीवित है उन्होंने अपने जीवन में मूर्तियों का निर्माण कराया था वह भी अपने दान के कारण आज भी चर्चाओं में रहते है। आज जो तुम भोग रहे हो वह पुराने कर्मों के कारण भोग रहे हो अगले भव के लिए तुमने क्या पुण्य किया है क्या कमाया है इस बारे में विचार करो एक मंदिर बनवाओ तो निश्चित रूप से पुण्य बना रहेगा।
– भव्य शिलान्यास एवं मुनि दीक्षा दिवस समारोह सम्पन्न
श्री 1008 अर्हतकूट जिनालय का भूमि पूजन एवं भव्य शिलान्यास समारोह आचार्य श्री समय सागर जी के मंगल आशीर्वाद से एवं मुनि श्री महासागर जी,मुनि श्री निष्कम्प सागर जी, मुनि श्री निष्काम सागर जी, मुनि श्री निर्दोष सागर ससंघ आर्यिका साधना मति माताजी,आर्यिका साधु मति माताजी के ससंघ सानिध्य में किया गया। आचार्य श्री 108 समय सागर जी का 47 वां मुनि दीक्षा दिवस समारोह भी भव्य रूप से मनाया गया
आचार्य श्री समय सागर जी महाराज की सामूहिक पूजन एवं 47 दीपकों से आरती की गई। मंदिर में मूल नायक प्रतिमा जी विराजमान करने का सौभाग्य विधानाचार्य बाल ब्र विजय भैया लखनादौन ने प्राप्त किया अन्य प्रतिमा जी रखने का सौभाग्य सोनू जैन आईटीआई, राजेश जैन शिक्षक, मुन्नालाल कपिल लंबरदार, अशोक जैन तेंदूखेड़ा, पुनीत जैन, राजकुमार जैन,मुकेश जैन तिगोड़ा आदि ने प्राप्त किया। इस अवसर पर सागर जैन समाज के अध्यक्ष मुकेश जैन ढाना, देवेंद्र जैना स्टील, ब्र रेखा दीदी, ब्र नीलम दीदी, उदासीन आश्रम की साधिकाएं, अरविंद पथरिया,भोलू कंफर्ट, जैन महिला मिलन, भाग्योदय महिला मंडल, बाहुबली महिला मंडल और बड़ी संख्या में जन समूह कार्यक्रम में उपस्थित रहा। कार्यक्रम का संचालन ब्र विजय भैया लखनादौन और ब्र अंकित भैया धनेटा ने किया