गोबर से बनाई जा रही मलरिया, होलिका दहन पर होगी पूजा-अर्चना
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
होली पर्व नजदीक आते ही दीवानगंज क्षेत्र के गांवों में पारंपरिक तैयारियां तेज हो गई हैं। ग्रामीण महिलाएं और बच्चे मिलकर गोबर से मलरिया (होलिका प्रतीक) तैयार करने में जुट गए हैं, जिन्हें होली के दिन विधि-विधान से पूजकर होलिका दहन किया जाएगा। ग्रामीण अंचलों में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार घर-घर में गोबर से विभिन्न आकारों की मलरिया बनाई जाती हैं। इन्हें सुखाकर सुरक्षित रखा जाता है और होली की संध्या पर पूजा-अर्चना के बाद होलिका में अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार और पशुधन की रक्षा होती है तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
गांवों में इन दिनों महिलाओं के समूह मलरिया बनाते हुए लोकगीत गाते दिखाई दे रहे हैं, वहीं बच्चे भी उत्साह से इस परंपरा में भाग ले रहे हैं। इससे ग्रामीण अंचल में होली का पारंपरिक और सांस्कृतिक माहौल बनने लगा है।
ग्रामीणों का कहना है कि आधुनिकता के दौर में भी यह परंपरा आज भी जीवित है और नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बन रही है। होलिका दहन तक गांवों में इसी प्रकार धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां जारी रहेंगी।