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धर्म आधारित नैतिक शिक्षा जीवन का आधार : पंडित शास्त्री जी

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शरद शर्मा बेगमगंज रायसेन

निकटवर्ती ग्राम मूंडला चावल में श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के प्रथम दिवस में कलश यात्रा झिरिया मंदिर से मूंडला चावल पहुंची। जिसमें क्षेत्रीय सभी गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कथा में पं.कमलेश कृष्ण शास्त्रीजी महाराज ने कहा वैलेंटाइन डे जैसे पश्चिमी उत्सव आज हमारे बच्चों के मन में ऐसे आकर्षण और विचार पैदा कर रहे हैं, जो उन्हें धीरे-धीरे हमारी संस्कृति, मर्यादा और पारिवारिक संस्कारों से दूर ले जा रहे हैं। किसी भी उत्सव का मूल्य इस बात से तय होना चाहिए कि वह हमारे समाज को क्या दिशा दे रहा है। यदि कोई परंपरा हमारी बहन-बेटियों की गरिमा, सुरक्षा और संस्कारों के विपरीत प्रतीत होती है, तो उसका हमे समर्थन नहीं करना चाहिए। हमें अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मर्यादा और नैतिक शिक्षा को सशक्त बनाना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ी चरित्रवान, संवेदनशील और संस्कारवान बने। यही सच्चे अर्थों में समाज और राष्ट्र की रक्षा का मार्ग है।

जिस घर में नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है और उस घर में सुख-शांति और समृद्धि स्वतः आती है। ऐसे घर में कलह कम और सद्भाव अधिक होता है। वहाँ बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होता है, क्योंकि वे सम्मान और संस्कार का वातावरण देखकर बड़े होते हैं। जिस घर में स्त्री सम्मानित, सुरक्षित और प्रसन्न रहती है, वही घर वास्तव में स्वर्ग समान बन जाता है, और वहाँ लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है।

 

उन्होंने कहाकि अपना दुख संसार वालों को कभी नहीं बताना चाहिए। दुनिया में बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो सामने तो सहानुभूति जताते हैं, पर पीछे से उपहास करते हैं। अपना दुःख सिर्फ गोविन्द से कहना चाहिए , क्योंकि वही अंतर्यामी हैं—आपके हृदय की हर धड़कन, हर आंसू और हर भावना को बिना कहे समझते हैं। संसार के सहारे सीमित हो सकते हैं, पर प्रभु का सहारा असीम होता है। इसलिए संसार से अपेक्षा कम रखें, और अपने विश्वास को प्रभु में दृढ़ रखें। जो गोविंद पर भरोसा करता है, वह कभी अकेला नहीं रहता।
अपने बच्चों को धर्म की शिक्षा अवश्य दें और उन्हें धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करें। जिस बच्चे के जीवन में धर्म का आधार होता है, उसका चरित्र मजबूत होता है। वह सही और गलत का अंतर समझता है, बड़ों का आदर करता है, छोटों से प्रेम करता है और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना सीखता है। धर्म जीवन को दिशा देता है, अनुशासन सिखाता है और कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है।

श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन दिनांक – 22 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक चलेगा समय: दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक रहेगा ।

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