श्रद्धालु खूब झूमे नाचे ,गुरुवार को महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ विशाल भंडारे का आयोजन होगा
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल विदिशा हाईवे 18 पर स्थित बैरखेड़ी चौराहे के राम जानकी मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में छठवें दिन कथावाचक पंकज आचार्य ने रास पंच अध्याय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महा रास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है।
कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कल्यवान का वध, उद्धव गोपी संवाद, ऊद्धव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय कथा का श्रवण कराया गया। महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला द्वारा ही जीवात्मा का परमात्मा से मिलन हुआ।
उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। भगवान श्रीकृष्ण रुक्मणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया। रुक्मणी विवाह के आयोजन ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान कथा मंडप में विवाह का प्रसंग आते ही चारों तरफ से श्रीकृष्ण-रुक्मणी पर जमकर फूलों की बरसात हुई। भक्तों ने श्री कृष्ण रुक्मणी के विवाह पर जोर-जोर से जय कारे लगाएं।

कथावाचक ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण-रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। कथा वाचक ने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है। इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है। यदि कोई कमी रहती है, तो वह मात्र संकल्प की होती है। संकल्प एवं कपट रहित होने से प्रभु उसे निश्चित रूप से पूरा करेंगे उन्होंने महारास लीला श्री उद्धव चरित्र, श्री कृष्ण मथुरा गमन और श्री रुक्मणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर विस्तृत रुप से कथा सुनाई।
गुरुवार को श्रीमद् भागवत कथा का आखिरी दिन है इस दिन महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ विशाल भंडारा का आयोजन किया जाएगा जिसमें बेरखेड़ी चौराहे,पूरा, कोसाखेड़ी, हलाली डैम, खोह, दीवानगंज, कुलहड़िया, नरखेड़ा, जमुनिया, निनोद, बरजोरपुर, सरार, कयामपुर, संग्रामपुर, करैया, गिदगढ़, सहित आसपास के 40 गांव के ग्रामीण भोजन के रूप में प्रसाद ग्रहण करेंगे।