विदिशा। नगर की साहित्यिक संस्था प्रयास के तत्वावधान में कवि–लेखक समागम–3 का आयोजन दिनांक 11 जनवरी 2026 को कामरेड माधोसिंह के निवास पर अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. जगमोहन शर्मा एवं निसार मालवी ने की। मंच पर गोवर्धन राजोरिया, शीलचंद पालीवाल तथा जय नारायण मेहता की गरिमामयी उपस्थिति रही। स्वागत वक्तव्य गोविन्द देवलिया द्वारा प्रस्तुत किया गया।
कवि गोष्ठी का सशक्त एवं सुचारु संचालन ब्रज श्रीवास्तव तथा संतोष शर्मा ‘सागर’ ने किया। गोष्ठी में सुरेंद्र श्रीवास्तव, शाहिद अली, राजेंद्र श्रीवास्तव, विष्णु दुबे, जगन्नाथ सिंह दाँगी, हबीब नादाँ, चाँद खाँ ‘चाँद’, तालिब मोहम्मद ‘तालिब’, सुशील शर्मा, अनुमा आचार्य, निश्चला शर्मा, दिनेश श्रीवास्तव, अशोक खरे, हरगोविंद मैथिल, राजेंद्र कटारे, आनंद सौरभ, संजय चतुर्वेदी, कोमल सिंह, राठौर, अजय राहुल, सुधा चौधरी, संतोष शर्मा सागर, राजेंद्र जैन, संतोष नामदेव, ब्रज श्रीवास्तव, मुकेश शर्मा, रघुराज सिंह, राजेश पंथी एवं सत्यनारायण सोनी ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

कविता पाठ के दौरान कई प्रभावशाली पंक्तियों ने श्रोताओं को विशेष रूप से आकृष्ट किया। अध्यक्ष डा. जगमोहन शर्मा ने अपने दोहे के माध्यम से मानवीय आकांक्षाओं और यथार्थ की त्रासदी को उकेरते हुए कहा—
“ऊँचा उड़ना शौक था या आदत थी खास
इक दिन गड्ढे में मिली, उस पंछी की लाश।”
कवि सुरेंद्र श्रीवास्तव की बाल-सुलभ चुटीली पंक्तियाँ—
“चुन्नू मुन्नू राजू देखो
ऐसे होते हैं काजू देखो”
ने वातावरण को सहज हास्य से भर दिया। वहीं अध्यक्षीय मंडल के सदस्य निसार मालवी ने समकालीन शहरी जीवन और रिश्तों के संकट को रेखांकित करते हुए प्रभावी अंदाज़ में पढ़ा—
“इतनी बड़ी यह भीड़ की चलना मुहाल है
रहने के वास्ते ना शहर में जगह बची
रिश्तों को हम संभाल कर रखें तो किस तरह
दिल में जगह बची है ना घर में जगह बची।”
कार्यक्रम में साहित्य सेवा के लिए विशिष्ट सम्मान भी प्रदान किए गए। श्री राम किशन असहाय को श्री शंभुदयाल शर्मा ‘विमल’ सम्मान, श्री प्रेम प्रकाश चौबे को श्री गोवर्धन लाल श्याम सम्मान, श्री *जयनारायण मेहता को श्री घनश्याम मुरारी पुष्प सम्मान, एश्री सैफी सिरोंजी को श्री लल्लूसिंह ‘हैराँ’ सम्मान तथा डॉ कमल चतुर्वेदी को श्री राजकुमार जैन स्मृति सम्मान से अलंकृत किया गया।

कार्यक्रम में श्री अरविन्द श्रीवास्तव, श्री उमेश शर्मा, श्री विमल प्रकाश तारण, , श्री चक्रवर्ती जैन, चारुलता सक्सेना, नीरज कनौजिया, श्री श्याम कौशिक, श्री अरुण सोनी, प्रवीण शर्मा , शिवकुमार तिवारी, राजकुमार शर्मा,मनोज शर्मा,एवं कमोद सिंह की विशेष उपस्थिति रही। आयोजन को कलेक्टर विदिशा अंशुल गुप्ता की प्रेरक उपस्थिति प्राप्त हुई। उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी के जन्मदिन के अवसर पर अपने संदेश में विदिशा को रत्नगर्भा बताते हुए कहा कि यहाँ रचनात्मक प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और कवियों को शुभकामनाएँ दीं।
विशेष वक्तव्य में कार्यक्रम के मेजबान कामरेड माधोसिंह ने सनातन के वास्तविक अर्थ को समझने और उसे जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर राजकुमार जैन स्मृति न्यास की ओर से बसंत महेश्वरी वकील और चक्रवर्ती जैन वकील ने,कामरेड माधोसिंह को शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में गोविन्द देवलिया ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।समूचा आयोजन विदिशा के साहित्यिक जीवन में एक स्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज हुआ।