रामभरोस विश्वकर्मा, मंडीदीप रायसेन
प्रदेश में ‘अजब-गजब एमपी’ के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे!लेकिन औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप की नगर पालिका इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में है। यहाँ प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार और कर्मचारियों की मिलीभगत की ऐसी दुर्गंध आ रही है! जिसने पूरी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
7 साल का इंतजार और टीन की छत
वार्ड क्रमांक 6 के निवासी 65 वर्षीय लक्ष्मण सिंह कठोतिया सरकारी सिस्टम की बेरुखी का जीता-जागता उदाहरण हैं। लक्ष्मण सिंह पिछले कई सालों से अपनी बेटी के साथ 400 स्क्वायर फीट के एक कच्चे टीन शेड वाले मकान में गुजर-बसर कर रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर वे नगर पालिका के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं! लेकिन उन्हें न तो आवास योजना का लाभ मिला और न ही उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन। एक पात्र व्यक्ति आज भी दर-दर भटकने को मजबूर है।
बिना मांगे ही मिल गया ‘आवास
वहीं वार्ड क्रमांक 7 के निवासी लालाराम लोवंशी का मामला नगर पालिका की कार्यशैली पर बड़ा तमाचा है। लालाराम ने कभी आवास योजना के लिए आवेदन तक नहीं किया!लेकिन जब वे अपनी रजिस्ट्री के लिए ‘नो ड्यूज’ सर्टिफिकेट लेने पहुँचे! तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। कंप्यूटर रिकॉर्ड में लालाराम को आवास योजना का लाभार्थी दिखाया गया है। जब उन्होंने इस पर सवाल किया!तो कर्मचारियों ने बड़ी ही मासूमियत से कह दिया— “गलती से लाभ मिल गया।
भ्रष्टाचार की बू या सोची-समझी साजिश
यह महज एक मानवीय त्रुटि नहीं बल्कि एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करती है। सवाल यह उठता है! कि बिना आवेदन और सत्यापन के किसी व्यक्ति के नाम पर आवास योजना का पैसा कैसे स्वीकृत हो गया!
अगर लालाराम को लाभ मिला तो वह पैसा गया कहाँ क्या यह कर्मचारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से कागजों पर किया गया गबन है!7 साल से आवेदन कर रहे लक्ष्मण सिंह जैसे पात्र हितग्राहियों को बार-बार क्यों टाला जा रहा है!
मंडीदीप नगर पालिका में भ्रष्टाचार का यह दीमक पात्रों का हक खा रहा है। एक तरफ जरूरतमंद सिस्टम की मार झेल रहा है!तो दूसरी तरफ रसूखदारों या सेटिंग करने वालों पर बिना मांगे मेहरबानी हो रही है।
नगर पालिका के कर्मचारियों का यह कहना कि ‘गलती से लाभ मिल गया’, मामले को रफा-दफा करने की कोशिश लगती है। लालाराम लोवंशी अब इस फर्जीवाड़े की जांच की मांग कर रहे हैं। यदि उच्च स्तरीय जांच होती है! तो आवास योजना की आड़ में करोड़ों के हेरफेर और फर्जी नामों पर पैसा निकालने के मामले सामने आ सकते हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इन लापरवाह कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई करता है या लक्ष्मण सिंह जैसे गरीबों को उनका हक मिलता है या नहीं।.
इनका कहना है
मेरे वार्ड में यह पहला मामला है! जिसके नाम पर आवास योजना का लाभ दिख रहा है उसे आवास मिला नहीं और जिसको लाभ मिलना चाहिए उसे अभी तक लाभ मिला नहीं! इसकी जांच होनी चाहिए!
दौलतराम इक्के पार्षद वार्ड नंबर 7 मंडीदीप नगर पालिका