पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था कार्यदिवस की बजाय मिलेगा मासिक मानदेय;उच्च शिक्षा मंत्री कह रहे प्रति दिवस के हिसाब से दिया जा रहा वेतन
घोषणा और हकीकत में अंतर
भोपाल। प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में पिछले कई सालों से व्याख्यान के लिए आमंत्रित अतिथि विद्वान भविष्य सुरक्षा और आजीविका हक के इंतजार में है।
हो सकता है अतिथि विद्वानों की और भी परेशानियां हों जिसका समाधान होना चाहिए था पर सितंबर 2023 में भोपाल में आयोजित महापंचायत के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा अतिथि विद्वानों को कार्य दिवस की बजाय 50 हजार रुपये मासिक मानदेय देने सहित अन्य घोषणाएं की गई थीं, तो अतिथि विद्वान आशान्वित हुए थे,लेकिन अब तक उन पर अमल नहीं हो सका।
रविवार को दमोह पहुंचे उच्च शिक्षा,तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री एवं दमोह जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार से जब इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि अतिथि विद्वानों को प्रति दिवस दो हजार रुपये के हिसाब से वेतन दिया जा रहा है और 44 हजार से लेकर 48 हजार रुपये तक का वेतन अतिथि विद्वानों को मिल रहा है। हालांकि मंत्री के इस बयान से भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी।
अतिथि विद्वानों का कहना था कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के बावजूद उसे लागू नहीं किया गया और अब प्रभारी मंत्री द्वारा दिए गए जवाब से भी स्पष्टता सामने नहीं आई।
घोषणा और हकीकत के बीच इस अंतर ने अतिथि विद्वानों की चिंता बढ़ा दी है। वर्षों से सेवा दे रहे ये अतिथि अपने भविष्य और मानदेय को लेकर चिंतित हैं जिन्हें कभी 25 प्रतिशत आरक्षण तो कभी फॉलेन आउट का झुनझुना पकड़ा दिया जाता है।पर उन्हें शासकीय सेवकों जैसा सम्मान नहीं मिलता।