मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
बरजोर पुर गांव का प्राइमरी स्कूल खंडर जैसे भवन में चल रहा है किसी भी दिन हो सकता है बड़ा हादसा।
शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए केंद्र से लेकर राज्य की सरकारें प्रयास में जुटी हैं। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। हालात यह है कि बुनियादी सुविधाएं स्कूलों से नदारद हैं। बरजोरपुर गांव में स्थित प्राइमरी स्कूल का भवन जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गया है। लेकिन बाहर से रंग रोगन कर कर चमका दिया गया है। देखने में ऐसा लग रहा है कि भवन अभी बना हो लेकिन अंदर भवन की स्थिति जर्जर अवस्था में है

कुछ ऐसा ही मामला है सांची विकासखंड के ग्राम बरजोरपुर के प्राइमरी स्कूल का है पहली से पांचवी क्लास बरसों पुराने भवन में लगाई जाती है, यहां भवन 1997 में बना था जिसमें जगह-जगह से दीवारों में दरारें पड़ रही हैं। बरजोरपुर का प्राइमरी स्कूल पहाड़ के नजदीक बना हुआ है स्कूल के बगल में ग्रामीणों ने अपने मकान बना है ग्रामीणों ने स्कूल के पास ही अपने पशु बांधना प्रारंभ कर दिए हैं जिससे पढ़ने वाले बच्चे और शिक्षकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नया साला भवन बने हुए 15 साल के लगभग हो गए हैं। मगर उसमें अभी तक क्लासे लगना प्रारंभ नहीं हुई है क्योंकि साला भवन ऊंचाई पर बना रहने के कारण नए भवन तक विद्यार्थियों को पहुंचने में समस्या आती है और सामने ही पानी भरा रहने के कारण अभी तक नए भवन में क्लास संचालित नहीं हो सकी है नया भवन पड़े पड़े क्षतिग्रस्त अवस्था में पहुंच गया है। नीचे का फर्श जगह-जगह खुद गया है। इसी भवन में देर रात असामाजिक तत्व बैठकर शराब पीते हैं।

इनका कहना हे
मैं जब से बरजोरपुर गांव में बच्चों को पढ़ने आई हूं तभी से इसी भवन में क्लास संचालित हो रही है। पूरे स्कूल में बारिश के समय छत से पानी टपकता है प्लास्टर नीचे गिर चुका है। भवन कई जगह से क्षतिग्रस्त अवस्था में है।
प्रभारी मधु लता शर्मा शिक्षिका
प्राइमरी साला भवन क्षतिग्रस्त अवस्था में है कई जगह से स्कूल में दरार पड़ चुकी है छत का कई जगह से प्लास्टर भी गिर चुका है इसके बावजूद भी हम लोगों को कक्षा एक से लेकर कक्षा पांचवी तक के 12 बच्चों को इसी जर्जर भवन में पढ़ना पड़ता है।
राधा शाक्य शिक्षिका