सुरेन्द्र जैन धरसीवां रायपुर
सांकरा निको।बीती रात सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित अरविंद गद्दा फैक्ट्री में भीषण आग लग गई सुबह तक आंख पर तो काबू पा लिया गया लेकिन इस आग ने कई सुलगते सवालों को जन्म दे दिया।अरविंद गद्दा फैक्ट्री सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र के फेस टू में एसकेएस रोड पर स्थित है और आसपास दो-तीन और फैक्ट्रियां भी सटी हुई हैं इन फैक्ट्री में श्रमिकों को फैक्ट्री के अंदर ही रूम बनाकर रखा जाता है जिससे ऐसी घटनाओं के समय कभी भी कोई बड़ी घटना होने का अंदेशा बना रहता है बावजूद इसके अधिकांश औद्योगिक इकाइयों में श्रमिक कॉलोनी फैक्ट्री से लगकर बनाई जा रही है जहां श्रमिकों को रखा जा रहा है लेबर ठेकेदार अपनी लेबर को अन्य प्रांतों से लाकर फैक्ट्री की बाउंड्री से लगकर बनाए गए कमरों में रखते हैं लेकिन उन श्रमिकों में कौन अपराधिक प्रवृत्ति के हैं कहां से आए हैं इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस प्रशासन को नहीं रहती है साथ ही यदि इन उद्योगों में अचानक रात के समय कोई बड़ा हादसा हो जाए या बड़ा अग्निकांड हो जाए तो उनकी जान माल को भी हानि हो सकती है बावजूद इसके अधिकांश उद्योगों में उद्योगों की दीवारों से लगकर सरकारी जमीन को दबाकर श्रमिकों के लिए कमरा बना लिए गए हैं जिनमें मजदूर असुरक्षित माहौल में रहते हैं

देर रात लगी आग सुबह तक पाया काबू
अरविंद गद्दा फैक्ट्री में रात लगभग 2:00 बजे अचानक आग लगी थी आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है शॉर्ट सर्किट से लगी आग तेजी से फैली और पूरी फैक्ट्री को अपनी चपेट में ले लिया देखते ही देखते कंपनी की मशीन और रॉ मैटेरियल जलकर राख बन गए आसपास की कंपनियों की करीब आधा दर्जन दमकल वाहनों ने आग बुझाने का प्रयास किया और सुबह तक आग पर काबू पाया गया कंपनी मालिक के मुताबिक फैक्ट्री में करोड़ों की आर्थिक क्षति हुई है जिसका आकलन होना अभी बाकी है पुलिस मामले की जांच कर रही है लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर आग जैसे ही लगती है उसे तत्काल कंट्रोल क्यों नहीं किया जाता क्या औद्योगिक इकाइयों में फायर सिस्टम की अनदेखी की जाती है जो छोटी सी आज भड़क कर विकराल रूप ले लेती है और दमकल के वाहनों से उस पर नियंत्रण किया जाता है
क्या कर रहा है औद्योगिक सुरक्षा विभाग
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी होती है कि वह समय-समय पर उद्योगों का निरीक्षण करें और सुरक्षा उपायों के बारे में देखें कि वह कंपनी में मौजूद है कि नहीं अब तक कई फैक्ट्रियों में ऐसे मामले देखे गए हैं जहां छोटी सी चिंगारी से आग भड़की और फायर सिस्टम मौजूद न होने के कारण उस आग ने विकराल रूप धारण किया यदि उद्योगों में फायर सिस्टम मौजूद हो तो आग पर तत्काल कंट्रोल किया जा सकता है लेकिन फायर सिस्टम एवं अन्य औद्योगिक स्वास्थ्य सुरक्षा की अनदेखी के चलते उद्योगों में इस प्रकार की घटनाएं विकराल रूप ले लेती है जो कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है ऐसे में उद्योग परिसरों में श्रमिकों की कॉलोनी बनाकर श्रमिकों को रखना भी खतरनाक साबित हो सकता है