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कत्लखाने नहीं अपितु करोड़ो गोकुल हुआ करते थे कभी भरत भूमि पर

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गाय को राजकीय दर्जा ओर गौग्रास योजना की हो शुरुआत

सुरेंद्र जैन धरसीवां

आचार्य श्री विद्यासागर जी के परम शिष्य पूज्य मुनि श्री भाव सागर जी ने कहा कि आज जिस भरत भूमि पर कत्लखाने दिखाई देते हैं उस पवित्र भरत भूमि में कभी करोड़ो गोकुल हुआ करते थे इसीलिए भारत उस समय विश्व गुरु हुआ करता था सुख शांति समृद्धि थी उन्होंने कहा कि गाय को राजकीय दर्जा ओर गौग्रास योजना शुरू होनी चाहिए
पूज्य मुनिश्री ने तीर्थ राज सम्मेद शिखर जी की ओर चल रहे पद विहार के दौरान पडकीडी में यह बात अपने अनमोल वचनों मे कही पूज्य मुनिश्री ने कहा कि पूरे भारत की गौशालाओं को समृद्ध बनाने के लिए गौ ग्रास योजना लागू होना चाहिए, भारत की रीढ़ मजबूत करना है तो गाय की रक्षा करो ,
पृथ्वी पर कोई सम्पदा है तो वह गाय है उसे मौत के घाट उतारा जा रहा है कोई रक्षा नहीं कर पा रहे हैं आचार्य श्री के आशीर्वाद से गायों की रक्षा हो रही है गायों को पालना बंद कर दिया इसलिए कत्लखाने जाने लगी ।
भारत की धरती पर करोड़ों गोकुल होते थे ,गौ माता बड़ी सयानी है,
गायो की रक्षा करे गौशालाओ में भेजे, राष्ट्र की रीढ़ गाय हैं, भारत देश गायों का रव सुनकर गौरव मानता था, गाय का पालन करें यह चेतन धन है सर्वश्रेष्ठ संपदा है, गाय चेतन धन है इसकी सुरक्षा करेंधर्मशास्त्र तो गोधन की महानता और पवित्रता का वर्णन करते ही है किन्तु भारतीय अर्थशास्त्र में भी गोपालन का विशेष महत्व है। कौटिल्य अर्थशास्त्र में गोपालन और गो रक्षण का विस्तृत वर्णन है। भारत में अनादिकाल से ही सभी का मुख्य कर्तव्य गोपालन ही रहा है। प्राचीन काल में जिसके पास ज्यादा गायें होती थीं, वही संपत्ति शाली माना जाता था, गाय से यह देश मंगल का स्थान बन गया था गाय के बिना आज अमंगल हो रहा है देश में। भारत के डॉ., वकील, ग्रंथकार, पत्रकार, बुद्धिजीवी, विद्वान नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, सर्विसमेन, बिजनेस मेन, गाय के पालन में सहयोग करें यह महत्वपूर्ण जीव रक्षा का कार्य है। आजकल गृहस्थों ने गाय रखना बंद कर दी है कार, मकान, दुकान, कपड़े, सप्त व्यसन, जुआं, शराब आदि में पैसा बर्बाद कर रहे हैं। लेकिन एक गाय नहीं रख पा रहे है। गाय के दूध से कैंसर, कोलेस्ट्राल, हृदय रोग, कोड़, ब्लडप्रेशर आदि बीमारियां ठीक होती हैं। गाय का दूध बुद्धिवर्धक होता है। 24750 मनुष्य एक गाय के जीवन भर दूध से तृप्त हो सकते है। गाय पर प्रेम से हाथ फेरने से ब्लड प्रेशर ठीक हो जाता है। गाय की पीठ पर सूर्य केतू स्नायु हानिकारक विकिरण को रोककर वातावरण को स्वच्छ बनाते हैं। हवन में घी के प्रयोग से वातावरण शुद्ध होता है। ओजोन की परत मजबूत होती है। गाय के रोम और निःस्वास से भी बीमारी ठीक होती हैं। गाय और बछड़े के रंभाने की आवाज से मनुष्य की अनेक मानसिक विकृक्तिया तथा रोग अपने आप नष्ट हो जाते हैं। गाय अपने सींग के माध्यम से कास्मिक पावर ग्रहण करती है। गाय के गोबर से टी.वी., मलेरिया के कीटाणु नहीं पनपते हैं। विनोबा भावे जी कहते थे कि ‘हिन्दुस्तानी सभ्यता का नाम ही गोसेवा है’। पहले आम के बगीचों में दूध की सिंचाई होती थी। गाय के दुग्ध पदार्थों में विष को समाप्त करने की क्षमता होती है। गाय के शरीर में विषैले पदार्थों को पचाने की क्षमता होती है। लगभग 8000 साल पहले सिंधु घाटी में गाय को पालतू बनाये जाने से एक क्रांति आयी थीं। इस तरह आप गाय की उपयोगिता के बारे में लोगों को बतायें प्रचार प्रसार करे

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