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जन्मदिन पर विशेष – कृष्णा गौर: जन्म से राजनेता बनने तक की प्रेरणादायक यात्रा

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दीपक कांकर

भारत में राजनीति केवल सत्ता और शासन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाजसेवा, जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति और राष्ट्र के उत्थान का मार्ग भी है। मध्यप्रदेश की राजनीति में एक ऐसा ही नाम है श्रीमती कृष्णा गौर, जिन्होंने न सिर्फ अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया, बल्कि महिला नेतृत्व का एक सशक्त उदाहरण भी पेश किया।

कृष्णा गौर का जन्म इंदौर में हुआ। भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर जी के पुत्र श्री पुरुषोत्तम गौर  से उनका विवाह हुआ।उनके ससुर स्व. बाबूलाल गौर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और मप्र के मुख्यमंत्री रहे। वे भारतीय राजनीति में ईमानदार और समाजसेवा के लिए समर्पित व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि ने कृष्णा गौर के जीवन और व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डाला।

बचपन से ही उन्हें राजनीति, समाजसेवा और जनकल्याणकारी कार्यों का वातावरण मिला। उनके परिवार में लोकहित के प्रति समर्पण और सेवा की भावना रची-बसी थी। शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में रुचि लेना, जनता की समस्याओं को समझना और समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा उन्हें प्रारंभ से ही मिलती रही।

शिक्षा और सामाजिक सरोकार

कृष्णा गौर ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और पढ़ाई के दौरान ही सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ाव बनाए रखा। वे महिलाओं, गरीबों और वंचित वर्गों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रही हैं।

उनके व्यक्तित्व की सबसे खास बात यह है कि वे जनता के बीच सरलता और सहजता से घुल-मिल जाती हैं। शिक्षा पूरी करने के बाद भी उन्होंने सीधे राजनीति में प्रवेश नहीं किया, बल्कि पहले समाजसेवा को अपना मार्ग बनाया।

राजनीतिक यात्रा की शुरुआत

कृष्णा गौर की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भोपाल नगर निगम से हुई। उन्हें नगर निगम की महापौर के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। इस जिम्मेदारी को उन्होंने बखूबी निभाया और राजधानी भोपाल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

महापौर रहते हुए उन्होंने शहरी विकास, स्वच्छता, जल आपूर्ति और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी। भोपाल को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की योजनाओं में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही।उनकी कार्यशैली ईमानदारी और पारदर्शिता पर आधारित रही, जिससे जनता के बीच उनकी छवि एक कर्मठ और संवेदनशील जननेता की बनी।

विधानसभा चुनाव और मंत्री पद तक का सफर

महापौर के रूप में सफल कार्यकाल के बाद कृष्णा गौर को पार्टी ने विधानसभा चुनाव का प्रत्याशी बनाया। वे गोविंदपुरा भोपाल क्षेत्र से विधायक चुनी गईं। उनके जीतने का प्रमुख कारण जनता से सीधा जुड़ाव और विकास कार्यों की साख थी।

विधानसभा में उनके कामकाज को देखते हुए उन्हें मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई। मंत्री बनने के बाद उन्होंने   महिलाओं, शिक्षा, शहरी प्रशासन तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं में उल्लेखनीय कार्य किया।

नेतृत्व शैली और कार्यशैली

कृष्णा गौर की नेतृत्व शैली में सादगी, संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प झलकता है। वे हमेशा जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनती हैं और त्वरित समाधान खोजने का प्रयास करती हैं।

उनकी प्राथमिकताएं 

महिला सशक्तिकरण : महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजनाओं को आगे बढ़ाना।

शहरी विकास : शहरों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करना।

युवा और शिक्षा : युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण से जोड़ना।

गरीब और वंचित वर्ग का उत्थान : समाज के निचले तबके तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना।

राजनीति का मार्ग चुनौतियों से भरा होता है। कृष्णा गौर को भी कई बार आलोचनाओं और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने धैर्य और कार्यकुशलता से हर परिस्थिति का सामना किया।

महापौर रहते हुए उन्होंने भोपाल को स्वच्छ भारत अभियान में आगे ले जाने में योगदान दिया। मंत्री बनने के बाद उनकी प्राथमिकताएँ और भी व्यापक हो गईं। उनका ध्यान केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रदेश में योजनाओं का लाभ पहुँचाने पर रहा।

महिला नेतृत्व का प्रतीक

भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी हमेशा से चर्चा का विषय रही है। ऐसे में कृष्णा गौर का नेतृत्व महिला सशक्तिकरण का प्रेरणास्रोत है। वे प्रदेश की उन गिनी-चुनी महिला नेताओं में से हैं, जिन्होंने अपनी पहचान मेहनत और कार्यों से बनाई है, न कि केवल पारिवारिक पृष्ठभूमि से।

उन्होंने साबित किया है कि यदि निष्ठा और सेवा भाव हो तो राजनीति में भी महिलाएँ शीर्ष पर पहुँच सकती हैं।

कृष्णा गौर का जीवन और राजनीतिक सफर यह संदेश देता है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम है। बचपन से मिले संस्कार, परिवार का सहयोग, समाजसेवा का अनुभव और जनता से गहरा जुड़ाव—इन सबने उन्हें एक सफल नेता और मंत्री बनाया।

उनकी यात्रा यह भी दर्शाती है कि महिला नेतृत्व से समाज और राजनीति को नई दिशा मिल सकती है। आज वे मध्यप्रदेश की राजनीति में एक सशक्त और प्रेरणादायक नाम हैं।

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