सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
जिले के गैरतगंज नगर में यातायात की समस्या एक लाइलाज बीमारी बन चुकी है, जिसका सबसे बड़ा कारण है फल-सब्जी विक्रेताओं का सड़कों पर अतिक्रमण। यह समस्या उस समय और गंभीर हो जाती है, जब प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह जाती है। हाल ही में, नगरवासियों की शिकायत पर प्रशासन ने इन दुकानदारों को हटाया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद वे फिर से अपने पुराने ठिकानों पर लौट आए, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था एक बार फिर चरमरा गई।
गैरतगंज का बस स्टैंड और मुख्य भोपाल-सागर मार्ग, दोनों ही लंबे समय से इन हाथ ठेला दुकानदारों के कब्जे में हैं। ये दुकानदार नगर परिषद द्वारा तय की गई जगह को छोड़कर, भीड़भाड़ वाले इलाकों में अपनी दुकानें लगाते हैं। इससे न सिर्फ यातायात बाधित होता है, बल्कि आम जनता को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पिछले कुछ दिनों से हालात इतने बिगड़ गए थे कि नगरवासियों ने इसका पुरजोर विरोध किया। लोगों की नाराजगी को देखते हुए, शुक्रवार को प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए इन सभी दुकानदारों को हटाया। इस कार्रवाई से लगा कि अब स्थिति सुधरेगी, लेकिन यह उम्मीद सिर्फ कुछ घंटों तक ही कायम रही। इसे प्रशासन की ढिलाई कहे या दुकानदारों की हठधर्मिता माने, दोपहर होते-होते, वे सभी दुकानदार फिर से बस स्टैंड और मुख्य सड़क पर आकर अपनी दुकानें लगाने लगे। हैरानी की बात यह रही कि इस बार कार्रवाई करने वाला प्रशासनिक अमला मौके से पूरी तरह नदारद था।

इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की ढिलाई और इन दुकानदारों की हठधर्मिता को उजागर कर दिया है। यह सवाल खड़ा होता है कि क्या प्रशासन सिर्फ दिखावे के लिए कार्रवाई करता है, या फिर उसके पास इन अतिक्रमणकारियों से निपटने का कोई ठोस प्लान ही नहीं है? जब तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक गैरतगंज की सड़कें इसी तरह ट्रैफिक जाम का शिकार होती रहेंगी।