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मध्यप्रदेश विधानसभा में उठाया गया अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण का मुद्दा

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– हरियाणा सरकार जैसे विधानसभा में प्रस्ताव लाकर विद्वानों का भविष्य सुरक्षित करे सरकार-महासंघ

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा सत्र के दौरान प्रश्न क्रमांक 420 के अंतर्गत विधानसभा सदस्य  पंकज उपाध्याय द्वारा राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में रिक्त पदों के विरुद्ध वर्षों से कार्यरत अतिथि विद्वानों की सेवा-स्थितियों,रिक्त पदों की स्थिति,उनके नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठाए गए।उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार द्वारा दिए गए उत्तर में स्वीकार किया गया कि वर्तमान में कुल 12895 पदों में से 7498 पद रिक्त हैं और इन रिक्त पदों पर वर्तमान में लम्बे समय से 4,015 अतिथि विद्वान कार्यरत हैं।

इस उत्तर के आलोक में अतिथि विद्वान महासंघ की ओर से एक मांग-पत्र एवं प्रतिक्रिया निम्न बिंदुओं के आधार पर प्रस्तुत की जाती है

प्रमुख बिंदु:
1. UGC रेगुलेशन 2018(अनुच्छेद 13)का स्पष्ट उल्लंघन:
UGC के नियमानुसार अनुच्छेद 13 में स्पष्ट कहा गया है कि –

“संविदा आधार पर नियुक्तियाँ (Appointments on Contract Basis) शिक्षकों की नियुक्ति केवल संविदा (Contract)आधार पर तब ही की जानी चाहिए जब यह पूर्णतः आवश्यक हो और जब छात्र-शिक्षक अनुपात निर्धारित मानकों को पूरा न कर रहा हो।ऐसे संविदा शिक्षकों को दिए जाने वाले निश्चित पारिश्रमिक (fixed emoluments)नियमित रूप से नियुक्त सहायक प्रोफेसर के मासिक सकल वेतन(monthly gross salary)से कम नहीं होना चाहिए।”

परंतु मध्यप्रदेश की स्थिति इस नियम का स्पष्ट उल्लंघन कर रही है,जहां 50% से अधिक पदों पर अतिथि विद्वान कार्यरत हैं।यह देश के उच्च शिक्षा मानकों के साथ समझौता है एवं कार्यरत अतिथि विद्वानों को ना तो UGC नियमानुसार वेतन दिया जा रहा है और न ही इनको API में अनुभव का कोई लाभ मिल रहा है।
2. चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता लेकिन अस्थायीता:-
विधानसभा उत्तर किया गया है की विद्वानों की नियुक्ति नीतिगत एवं पूरी पारदर्शिता के साथ होती है लेकिन स्थाइत्व ना मिलने से हजारों अतिथि विद्वानों की आजीविका अनिश्चित बनी हुई है।
3. सामाजिक सुरक्षा और सेवा लाभ से वंचित:-
सरकार द्वारा यह भी स्वीकार किया गया कि अतिथि विद्वानों को पीएफ,ईएसआई,चिकित्सा सुविधा,मातृत्व अवकाश आदि किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा प्राप्त नहीं है,जबकि वर्षों से वे नियमित कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।
4. स्थायी समाधान हेतु नीति निर्माण की कमी:-उत्तर में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में अतिथि विद्वानों के लिए कोई नियमितीकरण नीति प्रस्तावित नहीं है,जो हजारों अतिथि विद्वानों की सेवा,प्रतिष्ठा और भविष्य के साथ अन्यायपूर्ण स्थिति है। बाईट

इनका कहना हे

“मध्यप्रदेश सरकार स्वयं यह स्वीकार कर रही है कि वह UGC रेगुलेशन 2018 का पालन नहीं कर रही है।जब अतिथि विद्वान ही अधिकांश रिक्त पदों को भर रहे हैं,तो उन्हें स्थायी सेवा क्यों नहीं दी जाती? यह अतिथि विद्वानों का शोषण है और विद्यार्थियों के साथ भी अन्याय है।”
– डॉ अविनाश मिश्रा,उपाध्यक्ष महासंघ

“हम मांग करते हैं कि सरकार अतिथि विद्वानों की सेवा अवधि एवं योग्यता को आधार मानते हुए नियमितीकरण नीति शीघ्र बनाए और ज़ब हरियाणा सरकार विधानसभा में प्रस्ताव लाकर विद्वानों को स्थाइत्व दे सकती है तो फ़िर मध्य प्रदेश सरकार क्यों नहीं।महापंचायत की घोषणा भी अधूरी है सरकार को विद्वान हित में प्रस्ताव लाना चाहिए”
डॉ आशीष पाण्डेय,मीडिया प्रभारी महासंघ

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