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स्वास्थ्य केंद्र पर समय से नहीं पहुंचते डॉक्टर और कर्मचारी,बगैर इलाज लौट रहे मरीज

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मुकेश  साहू दीवानगंज रायसेन

सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दीवानगंज में इन दिनों डॉक्टरों और अन्य स्टॉफ की लापरवाही से अपनी बदहाली की कगार  पर हैं। इस अस्पताल में कभी नर्स सही समय पर नहीं पहुंचती तो कभी डॉक्टर पूरे दिन नहीं पहुंचते हैं। जिससे 25 से 30 गांव के मरीज परेशान हो रहे हैं।

 

सोमवार, मंगलवार और बुधवार तीन दिन को कोई भी डॉक्टर दीवानगंज अस्पताल नहीं पहुंचा इन तीनों दिनों में कई मरीज दिनभर अस्पताल में बैठकर शाम को अपने घर वापस लौट गए। 25 से 30 गांव के मरीज जब स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं तो उन्हें डॉक्टर नहीं मिलते है। जिससे मरीजों को या तो प्राइवेट चिकित्सकों के यहां जाकर इलाज कराना पड़ता है या मजबूरी में भोपाल या विदिशा जाना पड़ रहा है।
इससे लोगों का समय के साथ ही पैसे की भी बर्बादी होती है। इस समय बारिश का मौसम है। मौसमी बीमारियों की वजह से स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की संख्या दिन -प्रतिदिन बढ़ने लगी है, लेकिन डॉक्टर एवं स्टॉफ न तो कभी समय से आते हैं और न ही सही से इलाज करते हैं।

अस्पताल खुलने का समय सुबह 9 बजे का है लेकिन समस्त स्टाफ 11 से 12 बजे के बीच में पहुंचता है। जब तक मरीज अस्पताल में बैठे रहते हैं।
लंच के बाद अस्पताल वीरान हो जाता है। कोई भी स्टाफ नहीं रुकता है। सुबह 9 बजे से दूरदराज ग्रामीण इलाके से आकर डॉक्टरों एवं स्टाफ का 11 बजे तक इंतजार करते रहते हैं। जब डॉक्टर नहीं पहुंचता तो वापस चले जाते हैं। इस समय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दीवानगंज में डॉ. पलक पटेरिया है। परन्तु उनकी ड्यूटी भी ज्यादातर सांची ब्लॉक में लगाई जा रही है। जिससे दीवानगंज के आसपास गांव के मरीज परेशान हो रहे हैं
जबकि दूसरा डॉक्टर तृप्ति भारद्वाज 5 दिन की छुट्टी पर है। 3 दिन से दीवानगंज अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं रहा।
इसके चलते स्वास्थ्य केंद्र दीवानगंज में सभी व्यवस्थाएं शासन की फेल साबित हो रही हैं जिसके चलते न तो जनप्रतिनिधियों का ध्यान दे रहे हैं और ना ही प्रशासन ध्यान दे रहा है। हालत यह है कि मरीजों को निजी अस्पतालों की सेवाएं लेना पड़ रही हैं जिससे मरीजों को आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है। डॉक्टर के रोज अस्पताल न आने से ग्रामीणों में आक्रोश है।

आरोप है कि चिकित्सक समय से अस्पताल नहीं आते हैं। जिसके कारण मरीज परेशान होते है और नीम हकीम या निजी अस्पताल में उपचार कराने के लिए जाते है। ऐसे में गरीब तबके के मरीज भगवान भरोसे डाक्टर के इंतजार में बैठे रहते हैं। जबकि कुछ दिन पहले एक बच्चों की गर्भ में मौत होने के कारण मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी डॉक्टर एचएन मांडरे निरीक्षण करने पहुंचे थे। ग्रामीणों से चर्चा कर कहा था कि अस्पताल में सारी सुविधाएं ग्रामीणों को मिलती रहेगी।लेकिन ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिल रहा है।
रवि राठौर सीबीएमओ सांची ने बताया है कि इस समय सांची ब्लॉक में डॉक्टरो की कमी है दीवानगंज में पदस्थ डॉक्टर पलक पटेरिया की ड्यूटी सांची अस्पताल में लगाई जा रही है। 3 अगस्त तक कुछ डॉक्टर आ जाएंगे। फिर परमानेंट डॉक्टर दीवानगंज में उपलब्ध रहेंगे।

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