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महापुरुषों की तपोस्थली अति पावन धरा , सभी धर्मों के आस्था स्थल धार्मिक नगरी हुई तीर्थ क्षेत्र घोषित

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विंध्याचल पर्वत पर विराजमान माता का मंदिर सरकार ने किया तीर्थ क्षेत्र घोषित पूरे शहर में धर्मस्य कानून भी लागू हो

विनोद साहू बाड़ी रायसेन

नगरवासियों के लिए यह गौरव की बात हैं हम उस नगरी में जन्म लिए जो संत महात्माओं की तपोस्थली कहलाती हैं । अभी तक इस नगरी में कभी कुदृष्टि की छाया भी नहीं पड़ी और सभी लोग अमन चैन से रहते हैं ।
प्रकृति की गोद में बसा हैं शहर ‌
शहर में नगर पंचायत परिषद में 15 वार्डों में आपको धार्मिक स्थलों के दर्शन कराते हैं । वार्ड क्रमांक 15 में विंध्यवासिनी देवी का मनमोहक मंदिर के परिसर में प्रवेश करते ही आपको कुदरत की कारीगरी व मंदिर संचालनकर्ता की मेहनत नजर आयेंगी। मंदिर चढ़ने के लिए सीढ़ियों पर (चेत्र नवरात्रि)ग्रीष्म ऋतु की तेज धूप का नंगे पैरों में अहसास न हो इसके लिए पूरी सीढ़ियों पर कालीन ऊपर धूप से बचाने के लिए नेटजाली जगह जगह पेयजल के नल लगे हैं । मंदिर परिसर

के द्वार प्रवेश करते ही दोनों और फलदार पेड़ों वृक्ष की शीतल छाया में मन और शरीर की सारी थकावट खत्म हो जाती । माता जी दर्शन करने के बाद आप जब शहर की और रुख करते हैं तो बाड़ी शहर प्रवेश करती ही नहर के पास सुप्रसिद्ध बालाजी सरकार का मंदिर हैं जिसमें चमत्कार और नवरात्रि दशहरा पर मेला जैसा लगता हैं । बहां के दर्शन पश्चात आपको शटल डेम जो क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनदायिनी से बढ़कर हैं इसके पहाड़ी के ऊपर सिद्ध बाबा का मंदिर दूर से नजर आ जायेगा यह मंदिर भी मन को शांति और समृद्धि से परिपूर्ण करता हैं । उसके बाद मुख्य बांध के दर्शन कीजिए ऐसा लगता हैं हम समुद्र के किनारे खड़े हो।


बारना बांध के पास ही हजरत गुलाब शाह बाबा की दरगाह है, जो धार्मिक सौहार्द की मिसाल है. यहां पर हर वर्ष उर्स भराता हैं जिसमें आसपास के अंचलों से हजारों लोग आते हैं। उसके बाद भुजी का मंदिर, भूतेश्वर महादेव शनि मंदिर, गौड़ राजा के किले में श्रीजी मंदिर,जैन धर्म का अति प्राचीन बड़े बाबा का अतिशय क्षेत्र, राधा बल्लभ मंदिर फिर शक्ति पीठ के रुप में जगत जननी मां हिंगलाज माता का मंदिर बाड़ी कलां को संतों की तपोस्थली के रुप पहचान दिलाता हैं इस राम जानकी खाकी अखाड़ा मंदिर में आजादी से पहले नवाबी शासनकाल में मंदिर के रख रखाव और खर्च चलाने के लिए लगभग सो एकड़ भूमि दी गई थी , इस मंदिर में संस्कृत विश्वविद्यालय भी संचालित किया जा रहा ।
बारना नदी तट पर हनुमानजी का मंदिर और मस्जिद भी शहर के भाईचारे की मजबूती का अहसास करते हैं ।बाड़ी खुर्द में सिख धर्म का गुरुद्वारा और थोड़े आगे पंच मुखी हनुमान जी मंदिर।नगर की चारों दिशाओं में संतों की तपोस्थली और देवस्थान होने से नगर आज भी अमन चैन से हैं ।

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