सुरेंद्र जैन बाड़ी रायसेन
आदि तीर्थंकर भगवान आदिनाथ स्वामी का जन्म कल्याणक श्री श्री 1008श्री आदिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बाड़ी कलां जिला रायसेन मध्यप्रदेश में आज भक्ति भाव से मनाया जा रहा है
कौन थे आदि तीर्थंकर
अयोध्या के चौदहवें कुलकर राजा नाभिराय महारानी मरुदेवी के घर पूर्व सोलह स्वप्न देकर आदि तीर्थंकर भगवान आदिनाथ स्वामी का आज ही के दिन हजारों साल पहले जन्म हुआ था जिसे आदिनाथ जन्म कल्याणक के रूप में मनाया जाता है
भगवान आदिनाथ स्वामी को जब वैराग्य हुआ तो वह सारा राजपाठ त्यागकर दिगंबर मुनि के रूप में आत्मकल्याण के लिए कठिन तपस्या के पथ पर आगे बढ़ते हुए वन की ओर विहार किए कठिन तपस्या करते हुए अष्टापद कैलाश पर्वत से आदि तीर्थंकर भगवान आदिनाथ स्वामी ने निर्वाण को प्राप्त किया अर्थात मोक्ष गए

आदि तीर्थंकर भगवान आदिनाथ स्वामी के सौ पुत्रों में भरत और बाहुबली भी थे भरत ने छह खंडों पर अपना आधिपत्य स्थापित किया वह चक्रवर्ती हुए उन्हीं के नाम पर इस देश का नाम आर्यावर्त से भारत हुआ वहीं उनके भाई बाहुबली स्वामी भी तपस्या करते हुए मोक्ष प्राप्त किए
आदि तीर्थंकर आदिनाथ भगवान जब आदि काल में धरा पर जन्म लिए उस ये किसी को यह ज्ञान नहीं था कि क्या भोजन में लेना चाहिए क्या नहीं संसार में किस तरह रहना चाहिए अधिकांशतः मनुष्य योनि के प्राणियों को भी इसका ज्ञान नहीं था आदि तीर्थंकर आदिनाथ भगवान ने ही संसार को असी मसी कृषि ओर ऋषि का ज्ञान दिया
आदि तीर्थंकर आदिनाथ भगवान की दो पुत्रियों ब्रह्मी और सुंदरी को आदि तीर्थंकर आदिनाथ भगवान ने ही ब्राह्मी को अक्षर जान सुंदरी को अंक विद्या का ज्ञान दिया ओर फिर ब्राह्मी से ब्रह्मलिपि अक्षर ज्ञान सुंदरी से अंक ज्ञान गणित की शुरुआत हुई
यदि आज भी ये सारा संसार आदि तीर्थंकर आदिनाथ भगवान के बताए असी मसी कृषि ओर ऋषि का सदमार्ग का अनुशरण करे तो विश्व शांति के साथ भारत विश्वगुरु के रूप में संसार का नेतृत्व करेगा और संसारी जीवन हर प्राणी अपनी आत्मा का कल्याण करेगा।