मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भारत देश में अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग परंपराएं कई वर्षों से चली आ रही है इसी तरह की परंपरा निनोद गांव में भी वर्षों से निभाई जा रही है। होली होते ही रंग पंचमी पर करीला का मेला आने से पहले ही क्षेत्र में कहीं जगह पर राई नृत्य का आयोजन होने लगता है।

निनोद गांव में कई बरसों से ठाकुर बाबा के स्थान पर राई नृत्य कराया जाता है यह परंपरा कई बरसों से चली आ रही है। इसी परंपरा को निभाते हुए वर्तमान सरपंच हरिओम मीणा द्वारा तीज के दिन ठाकुर बाबा के स्थान पर पांच राईयों द्वारा नृत्य करवाया गया है ताकि गांव में सुख शांति बनी रहे हैं। ठाकुर बाबा के स्थान पर ग्रामवासी सबसे पहले पूजा आरती करते हैं। इसके बाद राई नृत्य चालू होता है। जो देर रात तक चलता रहता है। वहीं ठाकुर बाबा के स्थान की एक विशेषता है कि होली पर्व के बाद की गई पूजा में ठाकुर बाबा को चढ़ाए हुआ प्रसाद श्रद्धालुओं को हाथों में नहीं नहीं लेते बल्कि फेंककर दिया जाता है। श्रद्धालु प्रसाद को झेल कर प्राप्त करते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि ठाकुर बाबा के यहां जो भी मन्नत मांगते हैं, वह पूरी होती है इसलिए यहां पर प्रत्येक वर्ष होली के बाद राई नृत्य होता है। हर साल अलग-अलग जगह से राई नृत्य लाई जाती है।