-खमरिया खुर्द में विरसा मुण्डा जयंती पर कार्यक्रम आयोजित
देवेश पाण्डेय सिलवानी रायसेन
आदिवासी ग्राम खमरिया खुर्द में विरसा मुण्डा जयंती के अवसर पर जनजातीय गौरव दिवस समारोह का आयोजन पूर्व कैबिनेट मंत्री रामपाल सिंह राजपूत की विशेष उपस्थिति में किया गया। प्रारंभ में श्री राजपूत ने श्री राधा कृष्ण मंदिर में पहुंच कर पूजा अर्चना की तथा कार्यक्रम स्थल पर कन्या पूजन कर भगवान विरसा मुण्डा के चित्र पर माल्यार्पण किया ।

श्री राजपूत ने अपने संबोधन में बताया कि पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में ही अलग से आदिवासी कल्याण मंत्रालय बना। पहले आदिवासियों के लिए 25 हजार करोड़ से भी कम का बजट था। हमारी सरकार ने इसे 5 गुना बढ़ाकर सवा लाख करोड़ तक पहुंचाया।उन्होने कहाकि आदिवासी समाज वो है जिसने राजकुमार राम को भगवान राम बनाया। आदिवासी समाज ने भारत की संस्कृति और आजादी की रक्षा के लिए सैकड़ों सालों की लड़ाई को नेतृत्व दिया।आजादी के बाद के दशकों में आदिवासी इतिहास के योगदान को मिटाने के लिए कोशिश की गई। इसके पीछे भी स्वार्थ भरी राजनीति थी। राजनीति ये कि भारत की आजादी के लिए केवल एक ही दल को श्रेय दिया जाए।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने आदिवासी विरासत को संरक्षित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। आदिवासी कला और संस्कृति के लिए समर्पित कई लोगों को पद्म आदिवासी कला और संस्कृति के लिए समर्पित कई लोगों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। हमने रांची में भगवान बिरसा के नाम पर एक विशाल संग्रहालय शुरू किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीनगर और सिक्किम में दो आदिवासी अनुसंधान केंद्रों का भी उद्घाटन किया गया है।श्री राजपूत ने बताया कि एनडीए सरकार ने लेह में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा रिग्पा, अरुणाचल में नॉर्थ ईस्टर्न इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड फोक मेडिसिन रिसर्च की स्थापना की है। भारत में डब्ल्यूएचओ का ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन भी बनाया जा रहा है, इससे भारतीय आदिवासियों की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को देश और दुनिया तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम को भाजपा मंडल अध्यक्ष दीपक रघुवंशी ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम उपरांत ग्रामीणों की समस्याओं से अवगत होकर संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के निराकरण हेतु निर्देश दिए । इस अवसर पर वरिष्ठ नेता राकेश खरे, राज राज प्रताप सिंह, विक्रम शाह,सहित ग्रामीण, भाजपा कार्यकर्ता आदि मौजूद रहे।