मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल विदिशा हाईवे 18 पर रविवार को एक बुजुर्ग ढोल बजाते हुए निकाला तो लोगों ने रोक कर उससे पूछा कि तुम इस प्रकार की पैदल यात्रा क्यों कर रहे हो तो उन्होंने बताया कि मन में आया तो पैदल यात्रा करने लगा।
इंदौर के रहने वाले लक्ष्मण नामदेव ने बताया कि में कावड़ यात्रा करते करते बुजुर्ग हो गए हैं। लेकिन उम्र के इस पढ़ाव पर भी उनके कदम रुके नहीं है। लक्ष्मण नामदेव की उम्र 70 वर्ष से ऊपर है। छोटे छोटे कदम लेकर मजबूत इरादों और देशभक्ति की भावना के साथ यात्रा का क्रम जारी है। जो आखरी सांस तक जारी रखने का दवा करते हैं। नामदेव ज्यादा तेज नहीं चल पाते हैं बहुत धीरे-धीरे ढोल बजाते हुए चलते हैं।
7 जुलाई 2024 को इंदौर के राजवाड़ा से उन्होंने जल भरकर अपनी पैदल यात्रा की शुरुआत की गई थी। 11 जुलाई को उज्जैन से महाकालेश्वर को जल चढ़ाने के बाद नामदेव की पैदल यात्रा लगातार जारी है। रविवार को ढोल बजाते हुए दीवानगंज फैक्ट्री चौराहे पर पहुंचे।
लक्ष्मण नामदेव ने बताया की वे देवास से अयोध्या और फिर बोधगया जी (बिहार) जाएंगे। वहां पूजन अर्चना करेंगे उसके बाद वापस इंदौर आएंगे। उन्होंने बताया कि यात्रा विश्व राष्ट्रीय एकता, देश शक्ति और वीर बलीदानियों को समर्पित है। 20 साल की उम्र से में इस प्रकार की यात्रा करने का मन में आया। उन्होंने सोचा कि अपने लिए तो सब जीते हैं लेकिन देशभक्ति की सोच के साथ जीना अलग है। नामदेव उम्र के इस पड़ाव में तेज नहीं चल पाते हैं। लेकिन होसले बुलंद है। साथ में ढोल है जिसे बी बजाते हुए सड़कों से गुजरते हैं। उन्हें देखकर हर कोई सड़क पर रुक जाता है।
ढोल पर संदेश लिखा पोस्टर लगाए
नामदेव के ढोल के ऊपर एक पोस्टर लगा हुआ है। जिसमें कई संदेश लिखे हुए हैं। वे पप्पिया भी साथ में रखते हैं। जब जी चाहता है वह होठों से लगाकर देशभक्ति के गीतों का संगीत छेड़ देते हैं नामदेव के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं जो उन्हें यात्रा में सहयोग करते हैं साथ में एक फोन भी रखते हैं इससे परिवार बालों से संपर्क मैं रहते हैं। नामदेव ने बताया की लोगों के सहयोग से भोजन का इंतजाम हो जाता है ठहरने के लिए मंदिर या अन्य धार्मिक स्टार मिल जाता है नामदेव प्रतिदिन 10 से 15 किलोमीटर चलते हैं