संपादकीय
महात्मा गांधी, जिन्हें बापू के नाम से भी जाना जाता है, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता और विश्व को अहिंसा का मार्ग दिखाने वाले प्रेरक व्यक्तित्व थे। 2 अक्टूबर, उनका जन्मदिन, पूरी दुनिया में गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हमें उनके कृतित्व और कर्म को याद करने का अवसर देता है, जिन्होंने न केवल भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, बल्कि पूरी दुनिया को सत्य, अहिंसा और प्रेम के रास्ते पर चलने का संदेश दिया।
2 अक्टूबर, महात्मा गांधी का जन्मदिन, हमें उनके कृतित्व और कर्म को स्मरण करने का अवसर देता है। उनके द्वारा स्थापित सत्य और अहिंसा के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। उनकी सादगी, ईमानदारी और अनुशासन हमें सिखाते हैं कि कैसे हम अपने जीवन में सुधार ला सकते हैं और समाज को बेहतर बना सकते हैं। महात्मा गांधी का जीवन केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक प्रेरणा है। उनका योगदान न केवल भारत को स्वतंत्रता दिलाने में था, बल्कि उन्होंने पूरी दुनिया को यह सिखाया कि हिंसा के बिना भी बदलाव संभव है।
महात्मा गांधी का जीवन सादगी, अनुशासन और आत्मसंयम का प्रतीक था। वह अपनी जीवनशैली में आत्मनिर्भरता पर जोर देते थे और खादी पहनने और चरखा चलाने को आत्मनिर्भरता का प्रतीक मानते थे। उनके जीवन का हर पहलू उनके सिद्धांतों के अनुरूप था। वह शाकाहारी थे और जीवन भर सत्य के मार्ग पर चलने का प्रयास करते रहे।
महात्मा गांधी का जीवन एक महान सेवा और संघर्ष का उदाहरण है। 30 जनवरी 1948 को उन्हें नाथूराम गोडसे ने गोली मार दी। गांधीजी की हत्या ने न केवल भारत को बल्कि पूरे विश्व को झकझोर कर रख दिया। उनकी मृत्यु ने उनके द्वारा स्थापित आदर्शों को और भी अधिक महत्वपूर्ण बना दिया, और आज भी उनके विचार और सिद्धांत विश्वभर में प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भारत में पूरी की और फिर उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए, जहाँ उन्होंने कानून की पढ़ाई की। वकील बनने के बाद, उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में एक बड़ी कानूनी फर्म में काम किया। यह वही समय था जब उन्होंने वहां के भारतीयों के साथ होने वाले नस्लीय भेदभाव का सामना किया और इसके खिलाफ आवाज उठाई।
गांधीजी का सबसे प्रमुख योगदान सत्याग्रह और अहिंसा का सिद्धांत है। दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने “सत्याग्रह” (सत्य के प्रति आग्रह) का प्रयोग करते हुए अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध का मार्ग चुना। सत्याग्रह का मुख्य उद्देश्य हिंसा का त्याग कर विरोध करना था, जो गांधीजी के जीवन और कार्य का केंद्रीय हिस्सा बना। अहिंसा के सिद्धांत को उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी प्रमुखता दी। उनका मानना था कि हिंसा के मार्ग पर चलने से समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता, बल्कि प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने से ही दीर्घकालिक शांति संभव है।
1915 में भारत लौटने के बाद, महात्मा गांधी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू किया। उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण आंदोलन हुए, जिनमें असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन प्रमुख थे।
महात्मा गांधी ने 1920 में असहयोग आंदोलन की शुरुआत की, जिसमें भारतीय जनता को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ असहयोग करने का आह्वान किया गया। इसका उद्देश्य था कि भारतीय लोग ब्रिटिश शासन की नीतियों और उनके आर्थिक शोषण का विरोध करें और विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार करें। गांधीजी का यह आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक था, लेकिन चौरी-चौरा कांड के बाद उन्होंने इसे स्थगित कर दिया क्योंकि उस घटना में हिंसा हो गई थी।
महात्मा गांधी का अगला बड़ा आंदोलन था नमक सत्याग्रह, जिसे दांडी मार्च के नाम से भी जाना जाता है। 1930 में, गांधीजी ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ नमक पर लगाए गए कर के विरोध में यह आंदोलन शुरू किया। उन्होंने साबरमती आश्रम से दांडी तक 240 मील की पैदल यात्रा की और वहां समुद्र से नमक बनाकर ब्रिटिश कानून का उल्लंघन किया। यह आंदोलन ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनजागरण का प्रतीक बना और इसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।
1942 में गांधीजी ने “भारत छोड़ो आंदोलन” का आह्वान किया, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश शासन को तुरंत भारत छोड़ने की मांग की। इस आंदोलन का नारा था “करो या मरो,” और इसने भारतीय जनता को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अंतिम संघर्ष के लिए प्रेरित किया। गांधीजी के इस आंदोलन ने भारत को स्वतंत्रता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।
महात्मा गांधी ने केवल राजनीतिक स्वतंत्रता की बात नहीं की, बल्कि सामाजिक सुधार के लिए भी जोर दिया। उन्होंने अस्पृश्यता, जातिवाद, और धार्मिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया। उनका मानना था कि जब तक भारतीय समाज से इन बुराइयों को समाप्त नहीं किया जाता, तब तक सच्ची स्वतंत्रता संभव नहीं है। उन्होंने दलितों को “हरिजन” (भगवान के लोग) कहकर उनके अधिकारों के लिए संघर्ष किया और समाज में समता और समानता की स्थापना के लिए काम किया।
महात्मा गांधी के विचार केवल भारत तक सीमित नहीं रहे। उनके अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों ने दुनिया भर में आंदोलनों को प्रेरित किया। मार्टिन लूथर किंग जूनियर, नेल्सन मंडेला और दलाई लामा जैसे नेताओं ने गांधीजी के सिद्धांतों को अपनाया और अपने-अपने देशों में सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष किया।