रामभरोस विश्वकर्मा, मंडीदीप रायसेन
औद्योेगिक नगर में दसलक्षण पर्व के बुधवार को श्री नेमीनाथ दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के 9वे. तीर्थंकर भगवान सुविधनाथ का मोक्ष कल्याणक मनाया गया।
इस अवसर पर भगवान सुविधनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर निर्वाण लाढ़ू भी चढ़ाया गया। संत निवास में आयोजित प्रवचन के दौरान मुनि निराकुल महाराज ने कहा कि जीवन में पवित्रता होनी चाहिए, क्योंकि पवित्रता का भाव ही शौच धर्म को जाग्रत करता है। शास्त्रों के अनुसार मानव को हमेशा ज्ञानरूपी अमृत से आत्मा के कर्म मल को दूर करते हुए स्वयं शौच गुणों से पवित्र कर अपनी आत्मा से सुख रूपी अमृत को प्राप्त करना चाहिए। यदि पाप रूपी मल को धोना है।तो धर्म रूपी गंगा में नहाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जो मलिनताएं हमारे भीतर हैं। उन्हें हटाना चाहिए। अपने जीवन को, मन व कर्म को पवित्र बनाने के बारे में सोचना चाहिए। अपने अंदर की निर्मलता का भाव ही उत्तम शौच धर्म है। उन्होंने कहा कि संसार में मनुष्य लोभ के कारण ही अनेक दुखों को सहन करता है। आज आत्मा की चादर तो स्वच्छ है। पर वासना का धब्बा लग गया, क्योंकि आदत लेने की हो गई और देने की चली गई है। ज्ञात रहे। कि दिगंबर जैन समाज के पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के अवसर पर भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन के साथ प्रवचन, तत्वार्थ सूत्र का वाचन, प्रतिक्रमण, महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे है।