मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
कजलियां पर्व राखी यानी रक्षा बंधन पर्व के दूसरे दिन मनाया जाता है। इसे कई स्थानों पर भुजरियां/भुजलिया नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार प्रकृति प्रेम और खुशहाली से जुड़ा पर्व है। इसका प्रचलन सदियों से चला आ रहा है। इस बार यह पर्व मंगलबार को मनाया गया। दीवानगंज के भवानी चौक पर सभी ग्रामीण अपनी भुजरियों की टोकरिया लेकर इकट्ठे हुए राम जानकी मंदिर के सामने काजलियो के चारों ओर गीत गाकर उनका स्वागत किया।

भवानी चौक से कजलिया उठाकर दीवानगंज के मुख्य मार्ग भवानी चौक से होते हुए तालाब के किनारे रखकर वहां पर भी गीत गए गए और चारों तरफ महिलाओं ने काजलियो के चक्कर लगाए इसके बाद तलाव में काजलियो को तोड़ा गया। वहां से काजलियो को लेकर ग्रामीण मंदिर पर पहुंचे मंदिर पर कजलिया रखकर भगवान का आशीर्वाद लिया और घर घर जा जाकर बड़े से आशीर्वाद लिया तो छोटे बच्चों को प्यार दुलार दिया कजलियां पर्व के लिए श्रावण मास की अष्टमी और नवमीं तिथि को बांस की छोटी-छोटी टोकरियों में मिट्टी की तह बिछाकर गेहूं या जौं के दाने बोएं जाते हैं। बुजुर्गों के मुताबिक ये भुजरिया नई फसल का प्रतीक है।
कजलिया मुख्य रूप से राखी के दूसरे दिन की जाने वाली एक परंपरा है, जिसमें नाग पंचमी के दूसरे दिन खेतों से लाई गई मिट्टी को बर्तनों में भरकर उसमें गेहूं बोएं जाते हैं और उन गेंहू के बीजों में रक्षा बंधन के दिन तक गोबर की खाद और पानी दिया जाता है और देखभाल की जाती है।