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प्रेमी के खुदकुशी के हर मामले में प्रेमिका जिम्मेदार क्यों नहीं, चर्चा में दिल्ली HC का फैसला, जानें इसका जवाब

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प्यार में असफल होने पर या यूं कहें कि रिलेशनशिप बिगड़ने के कारण अगर कोई लड़का आत्महत्या करता है तो क्या इसके लिए लड़की पर मुकदमा हो सकता है. क्या लड़की के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में कार्रवाई की जा सकती है. यह सवाल अगर आपके भी जेहन में आ रहा है तो इसका जवाब दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले से मिल जाता है.

हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर प्यार में असफल होने पर कोई शख्स सुसाइड कर लेता है तो इसके लिए किसी महिला को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. इससे पहले पिछले साल दिसंबर में इसी मुद्दे पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी बड़ी टिप्पणी की थी. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा था कि यदि कोई भी व्यक्ति प्रेम में असफलता के कारण खुदकुशी कर लेता है, तो उसकी प्रेमिका के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं दर्ज किया जा सकता है.

आईपीसी की इस धारा के तहत होती है कार्रवाई

दरअसल, आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए इंडियन पेनल कोड यानी आईपीसी की धारा 306 के तहत किसी के खिलाफ कार्रवाई की जाती है. इसके लिए दो अहम जरूरतें होती हैं, एक तो खुदकुशी और दूसरी खुदकुशी के लिए उकसाना. ऐसे ही एक मामला दिल्ली हाईकोर्ट के सामने आया था, जिसमें सुसाइड के लिए उकसाने के मामले में दो लोगों ने जमानत के लिए याचिका दायर की थी.

मृतक के पिता ने दर्ज कराई थी एफआईआर

इस मामले में एक महिला और उसके दोस्त के खिलाफ मृतक के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी. मृतक के पिता ने दोनों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उसके बेटे को आत्महत्या के लिए उकसाया था. पिता का कहना था कि महिला उसके बेटे के साथ रोमांटिक रिलेशनशिप में थी, जबकि दूसरा आरोपित उन दोनों का कॉमन फ्रैंड था. पिता का आरोप था कि दोनों ने मृतक को यह कहकर उकसाया था कि वे दोनों जल्द शादी कर लेंगे, क्योंकि उनके बीच शारीरिक संबंध थे. मृतक ने अपने सुसाइड नोट में भी लिखा था कि उन दोनों यानी महिला और कॉमन फ्रैंड के कारण वह आत्महत्या कर रहा है.

अग्रिम जमानत के लिए पहुंचे थे हाईकोर्ट

अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद महिला और उसके दोस्त ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी. इस मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर कोई प्रेमी प्रेम में असफल होने के कारण जान देता है तो महिला को सुसाइड के लिए उकसाने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. इसके साथ ही महिला और उसके दोस्त की गिरफ्तारी पर रोक लगाने वाली अंतरिम जमानत मंजूर कर ली.

किसी के गलत फैसले के लिए कोई और जिम्मेदार नहीं

इसी महीने की 16 तारीख को दिए अपने फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट की एकलपीठ के न्यायाधीश अमित महाजन ने कहा कि अगर कोई प्रेमी प्रेम में असफल होने पर सुसाइड करता है, अगर कोई छात्र परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाने के कारण जान देता है, अगर कोई क्लाइंट अपना केस खारिज होने के बाद खुदकुशी करता है, तो क्रमशः महिला, परीक्षक और वकील को सुसाइड के लिए उकसाने का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि किसी कमजोर मानसिकता वाले इंसान द्वारा लिए गए गलत फैसले के लिए किसी और को खुदकुशी के लिए उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता है.

जस्टिस महाजन ने कहा कि आईपीसी की धारा 306 के अनुसार सुसाइड के लिए उकसाने की कार्रवाई के लिए दो जरूरतें होती हैं, आत्महत्या और आत्महत्या के लिए उकसाना. कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में पेश किए गए व्हाट्सएप चैट से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि मृतक काफी संवेदनशील था और जब भी महिला उससे बात करने से मना करती थी, तो वह जान देने की धमकी देने लगता था.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी दिया था ऐसा ही फैसला

इसी तरह के एक मामले में साल 2023 में सात दिसंबर को दिए अपने फैसले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू ने कहा था कि कोई छात्र परीक्षा में खराब प्रदर्शन करने के कारण आत्महत्या करता है या कोई व्यक्ति अपना मुकदमा खारिज होने के कारण सुसाइड कर लेता है, तो उसके शिक्षक या संबंधित वकील को आत्महत्या के लिए उकसाने का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. अपने आदेश में जस्टिस साहू ने कहा था कि कोई प्रेमी अगर प्रेम में असफलता के कारण खुदकुशी करता है, तो महिला को इसके लिए उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता है.

कोर्ट ने कहा था कि कमजोर मानसिकता वाले इंसान द्वारा लिए गए गलत फैसले के लिए किसी अन्य इंसान को खुदकुशी के लिए उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अश्विनी कुमार दुबे कहते हैं कि कानून कहता है कि जब तक खुदकुशी के लिए प्रेरित या मजबूर करने का ठोस साक्ष्य न हो तब तक किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, चाहे मामला प्रेमी के खुदकुशी करने का हो या किसी और के। वह कहते हैं कि इस सिलसिले में अदालतों ने अपने फैसले दे रखे हैं.

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