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नवाचार: अब रंगों से जान सकेंगे किस हैंडपंप में कितना पानी

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जबलपुर। गर्मी में पेयजल व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए जिला पंचायत ने रंगों के जरिए नवाचार किया है। ग्राम पंचायतों में लगे लगभग 10 हजार 120 हैंडपंपों को जिले में पहली बार तीन रंगों से रंगा गया है। इन रंगों के जरिए ग्रामीण जान सकेंगे कि किस हैंडपंप से कब तक पानी मिलेगा।

हैंडपंपों को पुनर्जीवित करने की कार्ययोजना भी प्रारंभ गई है

पेयजल की उपलब्धता बरकरार रखने के लिए एक अप्रैल से 30 जून के बीच बंद होने वाले हैंडपंपों को पुनर्जीवित करने की कार्ययोजना भी प्रारंभ गई है। इनके आसपास भूजल को रिचार्ज करने के साथ ही शोकपिट निर्माण और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को भी अमल में लाया जा रहा है। जिला पंचायत का दावा है कि जिले में हैंडपंप, नल-जल की शिकायतों की निराकरण करने के लिए कंट्रोल रूम जनपद और जिला स्तर पर स्थापित किए गए हैं। शिकायतों का निराकरण 24 घंटे के भीतर किया जाएगा।

ऐसे समझें हैंडपंपों का रंग

हरे रंग के हैंडपंप: इनमें 30 जून तक यानी मानसून के आने तक पानी की कमी नहीं होगी।

लाल रंग के हैंडपंप: 31 मार्च तक जांच के बाद बंद पड़े या अनुपयोगी हैंडपंप

पीले रंग के हैंडपंप: एक अप्रैल से 30 जून के बीच कभी भी बंद हो जाने वाले हैंडपंप

इसलिए कराई गई कलर कोडिंग

गर्मी में पानी की समस्या से निजात पाने के लिए जिले में स्थित लगभग दस हजार 120 हैंडपंपों की कलर कोडिंग की गई। हरे हैंडपंप जो साल भर पानी देते हैं। 92 लाल हैंडपंप जो अब अनुपयोगी हो चुके हैं व 31 मार्च की स्थिति में बंद है। 1200 पीले हैंडपंप जो गर्मी में प्राय सूख जाया करते हैं। हैंडपंपों की जियो टैगिंग कराई गई है, जिससे उनकी गूगल अर्थ पर रियल टाइम मानीटरिंग की जा सके। जियो टैगिंग से सभी हैंडपंपों का यूनिक कोड बनाया गया है। इससे हर हैंडपंप तक पहुंचने में मदद मिलेगी। जियो मैपिंग से हैंडपंप की विजुअल मैपिंग और जलस्तर की जानकारी भी उपलब्ध हो सकेगी।

पीले हैंडपंप बनेंगे सहारा, अपनाए सुधार के उपाय

पेयजल संकट से उबरने के लिए पीले हैंडपंप ग्रामीण क्षेत्रों में सहारा बनेंगे। पंचायतों में लगे इन पंपों को सुचारु बनाए रखने के लिए अभियान चला कर राइजिंग पाइप और मोटर पंप डालकर इन्हें गर्मी भर चलाने के लिए तैयार कराया जा रहा है। हैंडपंपों के पास में शोक पिट निर्माण, वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, परकोलेशन टैंक (सोख्ता गड्ढे), कुआं रिचार्ज आदि के कार्य भी कराए जा रहे हैं। इस कार्य के जरिए उपयोग हो चुके पानी को वापस जमीन में डाला जा रहा है, ताकि जलस्तर सामान्य रहे।

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