सुनील सोन्हिया की रिपोर्ट
भोपाल ।शहर की विभिन्न संस्थाओं द्वारा नव वर्ष 2024 का स्वागत भिन्न भिन्न तरीके से पार्टी आयोजित कर के की वहीं शाइनिंग स्टार ग्रुप ने बार्बी डॉल थीम पर की नव वर्ष की शुरुआत पार्टी की ।

आयोजक विद्या सोन्हिया एवम मंजू महेश ने बताया कि इस बार हम सभी डिम्पल पाराशर, रंजना,अर्चना, उषा, सुमन जोशी, अंजना यादव्, रेशू, प्रिया अंजना श्रीवास्तव, डॉली, कृति, सुमन शर्मा ने बार्बी डॉल थीम पर पार्टी में, गेम्स, तंबोला खेलकर कर धमाल मचाया ।

उल्लेखनीय है कि अपनी बेटी बारबरा के नाम पर बार्बी डॉल बनाने वाली हैंडलर का कहना है कि वह खुद कमाती थीं और इसलिए उनकी नजर में जो पहली छवि डॉल के लिए उभरी वह थी आकर्षक और आत्मनिर्भर महिला. इस तरह से बार्बी डॉल की शुरुआत हुई.
साल 1945 में अमेरिका निवासी रूथ हैंडलर अपने पति इलियट हैंडलर के साथ गुड़िया घर के लिए फर्नीचर बनाया करती थी। उनकी बेटी बारबरा को उन्होंने एक दिन कार्ड बोर्ड की गुड़ियों से खेलते हुए देखा। उन्होंने देखाा कि वह गुड़िया को एक से बढ़कर एक शानदार पोशाकें पहनाती है फिर उन्होंने अपनी बेटी की अन्य सहेलियों से बात की और उन्हें यह पता चला की उन सभी को गुड़िया से खेलना बहुत पसंद था।इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी के लिए शानदार डॉल बनाने के लिए जापान गई और अलग-अलग खिलौना उत्पादकों से मिलकर कई प्रयोग किए
आखिरकार वह शानदार गुडिया बनाने में कामयाब हो गई और इस गुड़िया का नाम अपनी बेटी बारबरा के नाम पर बार्बी रखा।

बॉर्बी कभी काले रूप में आई तो कभी गोरे रूप में। कभी इसे लंबे बालों के साथ देखा गया तो कभी छोटे बालों में भी पेश किया गया इसके अलावा साल 1965 में आर्मस्ट्रांग के चांद पर जाने के चार साल पहले ही बार्बी अंतरिक्ष यात्री के अवतार में आ गई थी। बार्बी के सभी रूप काफी पसंद किए गए
बाजार में कई तरह के खिलौने मौजूद हैं, इसके बावजूद बॉर्बी डॉल छोटी बच्चियों को बहुत पसंद है और इसकी लोकप्रियता में आज भी कोई कमी नहीं आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हर साल लगभग 200 से ज्यादा देशों में पांच करोड़ 70 लाख बार्बी की बिक्री होती है।