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आपत्तिजनक टिप्पणी मामलाः तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य ने कहा- मैंने किसी जाति का नहीं किया अपमान, जानिए क्या कहा था?

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चित्रकूटः जाति विशेष  का नाम लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर लोगों के निशाने पर आए तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य का कहना है कि उन्होंने कभी किसी जाति का अपमान नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘चमार’ शब्द का प्रयोग उन्होंने जाति के संबंध में नहीं किया था।

जाति के आधार पर ऊंच-नीच की बात करने वाला खुद महानीचः भीम आर्मी चीफ 
बता दें कि सोसल मीड़िया पर तेजी वायरल हो रहे एक वीड़ियो में जगद्गुरु रामभद्राचार्य कह रहे हैं  कि जो राम को नहीं मानता, वे चारों वर्ण ‘चमार’ हैं।  इस टिप्पणी को लेकर भीम आर्मी आक्रोशित है। भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने तो एक्स में ट्वीट कर जगद्गुरु को जातीय कुंठा से ग्रसित एक पाखंडी तक बताया है। साथ ही इस तरह के बयान को मेहनतकश एससी, एसटी, ओबीसी वर्गों व जातियों और महापुरुषों का अपमान बताया है। इसे यह बहुजन समाज बर्दाश्त नहीं करेगा. व्यक्ति कर्म से बड़ा होता है, जाति से नहीं, जाति के आधार पर ऊंच-नीच की बात करने वाला खुद महानीच होता है.”

रामभद्राचार्य ने समझाया ‘चमार’ का मतलब
जगद्गुरु ने इस मामले में आगे कहा कि राम को न मानने वाला ब्राह्मण भी ‘चमार’ है। ‘चमार’ का मतलब है चाम का भक्त। इससे किसी जाति का संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि महाकवि तुलसीदास ने चमार शब्द का उपयोग रामायण में नहीं किया है। तुलसी सतसई में एसा है जो प्रमाणिक नहीं है।

रामजी का कोई बहिष्कार कर सकता है क्या? 
कई राजनीतिक पार्टियों और शंकराचार्यों के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में अयोध्या न जाने के निर्णय को लेकर भी तुलसी पीठाधीश्वर का स्पष्ट मत है। उनका कहना है कि उन्होंने तो बहिष्कार नहीं किया। सवाल किया कि रामजी का कोई बहिष्कार कर सकता है क्या। हम तो वहां एक हजार आठ कुंडीय हनुमान महायज्ञ कर रहे हैं। हमारा पांडाल सबसे सुंदरतम बना है, जिसमें पांच लाख लोग बैठ सकते हैं। बहिष्कार करने से क्या होगा।

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