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राहुल की भारत जोड़ो यात्रा-2 में दिखेगा यूपी का दम:20 से 25 दिन अखिलेश, जयंत और तेजस्वी के साथ यात्रा करेंगे

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पश्चिम की 27 सीटों पर विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA की नजर

लखनऊ।राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा-2 में यूपी का दम नजर आएगा। 80 लोकसभा वाले इस प्रदेश में राहुल की 20 से 25 दिन यात्रा निकालने की प्लानिंग है। सिर्फ यही नहीं, प्रियंका के अलावा उनके साथ विपक्ष के बड़े चेहरे सपा के वरिष्ठ नेता और यूपी विधान सभा में नेता विपक्षी दल अखिलेश यादव, आरएलडी नेता जयंत चौधरी और बिहार के उप मुख्य मंत्री तेजस्वी यादव यात्रा में भाग लेंगे और ज्यादातर ध्यान पश्चिमी यूपी पर रहेगा। इसके जरिए कांग्रेस लोकसभा की 27 सीटों को साधने की कोशिश करेगी।

दरअसल, राहुल 15 अगस्त से भारत जोड़ो यात्रा का पार्ट-2 निकालने की तैयारी कर रहे हैं। इसकी शुरुआत गुजरात के पोरबंदर (जहां महात्मा गांधी का जन्म हुआ था) से होगी। समापन नॉर्थ ईस्ट में त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में होगा।

भारत जोड़ो यात्रा के फर्स्ट फेज में राहुल ने करीब 4 हजार किमी का सफर तय किया था। शुरुआत 7 सितंबर को कन्याकुमारी से हुई। लेकिन, 136 दिन की राहुल की इस यात्रा में यूपी की हिस्सेदारी महज 2-3 दिन की रही। राहुल 120 किमी. पैदल चले। गाजियाबाद से प्रवेश करते हुए शामली, बागपत होते हुए हरियाणा चले गए।

तब सवाल उठे थे कि आखिर इतने बड़े यूपी में 2 दिन ही क्यों? कांग्रेस नेताओं ने जवाब दिया था कि इसकी कसर अगली भारत जोड़ो यात्रा-2 में पूरी की जाएगी। यही वजह है कि सेकेंड फेज में कांग्रेस यूपी को सबसे ज्यादा वक्त देने की तैयारी में है।यूपी में इस बार प्रियंका गांधी यात्रा से ज्यादा जनसभाओं पर जोर देंगी। यानी सीधे पब्लिक कनेक्ट पर फोकस रहेगा। इसकी शुरुआत वह मध्य प्रदेश से कर भी चुकी हैं।

भारत जोड़ो यात्रा-2 का चरण कैसा होगा. यूपी में राहुल-अखिलेश फिर एक साथ दिखेंगे
यूपी में 2017 के लोकसभा चुनाव में ‘यूपी को ये साथ पसंद है’ टैगलाइन के साथ राहुल-अखिलेश यानी कांग्रेस और सपा ने गठबंधन किया था। हालांकि, जनता ने इस टैगलाइन को नकार दिया। प्रदेश की 403 सीटों में सपा महज 47 और कांग्रेस 7 पर सिमट गई थी। हालांकि, अब 2024 के लोकसभा में राहुल और अखिलेश की जोड़ी फिर नजर आनी तय है।

विपक्ष के गठबंधन पीडीए (अब INDIA) की बेंगलुरु में हुई बैठक में भी दोनों के बीच अच्छी बॉडिंग नजर आई। सियासी जानकारों का कहना है कि राहुल की पहली भारत जोड़ो यात्रा के लिए भी जयंत और अखिलेश को निमंत्रण गया था।

हालांकि, दोनों नेता शामिल नहीं हुए थे। लेकिन, पीडीए गठबंधन बनने के बाद अब तस्वीर बदल चुकी है। ऐसे में अखिलेश के साथ ही जयंत और तेजस्वी का शामिल होना भी लगभग तय माना जा रहा है।

भारत जोड़ो यात्रा के फर्स्ट फेज में राहुल ने करीब 4 हजार किमी का सफर तय किया था। शुरुआत 7 सितंबर को कन्याकुमारी से हुई थी।

अलग-अलग ग्रुप के लोगों से मिलने पर जोर
भारत जोड़ो पार्ट-2 का स्वरूप पिछली बार से बदला हुआ दिखेगा। पैदल यात्रा से ज्यादा फोकस इस बार अलग-अलग ग्रुप के लोगों से मिलने पर रहेगा। कांग्रेस पूरे प्रदेश में कई अभियान चला रही है, जैसे जाति जनगणना, संविधान बचाओ। इसके लिए, अल्पसंख्यकों के लिए भी अलग-अलग जिलों में पहले से कई कार्यक्रम हो रहे हैं। ऐसे में राहुल-प्रियंका इन लोगों से मिलेंगे। इसका सीधा फायदा होगा कि पीपल कनेक्टिविटी बढ़ेगी।

पश्चिम यूपी पर फोकस, कई बड़े नेता संपर्क में:
पार्टी से जुडे़ सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस का फोकस पूर्वी यूपी की बजाए पश्चिम यूपी पर ज्यादा है। इसलिए, यहां कांग्रेस ज्यादा फोकस कर रही है। भारत जोड़ो-2 यात्रा का रुट अभी क्लीयर नहीं हैं। हालांकि, माना जा रहा है कि सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, देवबंद, बागपत, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, बरेली, बदायूं, अलीगढ़ के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया, महाराजगंज, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़ कुशीनगर जैसे जिलों को कवर कर सकती है। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का मानना है कि जहां उनका संगठन मजबूत है, वहां यात्रा को ज्यादा वक्त दिया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दलों के कई बड़े मुस्लिम नेता कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में हैं। चुनाव के नजदीक वो सभी पंजे को थाम सकते हैं। यही नहीं, कांग्रेस का एक टागरेट यह भी है कि यूपी में जहां पार्टी खुद मजबूत स्थिति में नहीं है। वहां गठबंधन के सहयोगी दलों का फायदा करके भाजपा को नुकसान पहुंचाया जाए।

सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर अभी कोई बात नहीं:
भारत जोड़ो यात्रा पार्ट-2 का रूट सियासी नफा-नुकसान के आधार पर तय किया जा रहा है। कांग्रेस यूपी में अपने एलायंस के साथियों से भी यात्रा के रूट को लेकर विचार विमर्श कर रही है। चूंकि बेंगलुरु की बैठक में साथ तो नजर आए। मगर सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर अभी भी कोई बात नहीं हो पाई है। इसलिए दल तो मिल गए हैं, मगर दिल मिलना अभी भी बाकी है। सभी दल मुंबई में होने वाली INDIA की बैठक के बाद निर्णय लेंगे।

30 जनवरी 2023 को भारी बर्फबारी के बीच भारत जोड़ो यात्रा श्रीनगर में खत्म हो गई थी। राहुल ने क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में 35 मिनट लंबी स्पीच दी थी।
एकजुटता दिखाने के लिए जुड़ेंगे कई बड़े नेता:
भारत जोड़ो यात्रा-2 का रूट मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए प्लान किया जा रहा है। साथ ही, 2024 में लोकसभा चुनाव भी हैं। जनता को एकजुटता का एहसास दिलाने के लिए राहुल के साथ विपक्ष के बड़े चेहरे भी शामिल होंगे।

राहुल की पहली यात्रा के बाद हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में जीत दर्ज की थी। इसीलिए उत्साह से लबरेज राहुल लोकसभा चुनाव को देखते हुए भारत जोड़ो यात्रा पर जोर दे रहे हैं।

उल्लेखनीय है की राहुल ने साबित किया, जनता से संवाद की कोई काट नहीं है .राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखेड़े का कहना है कि विपक्षी दलों को ये बात पता है कि भाजपा जैसी पार्टी से लड़ने के लिए उसी की तरह काम करना पड़ेगा। जमीन पर उतर कर जनता से संवाद स्थापित करना पड़ेगा। वरना दिल्ली और दूर होती जाएगी। भारत जोड़ो यात्रा के जरिए राहुल गांधी ने ये साबित कर दिया है कि जनता से सीधे संवाद की कोई काट नहीं है।

यात्रा से राहुल ने विपक्ष की बनाई हुई अपनी ‘पप्पू’ वाली छवि को बदल डाला है। हाथ में फ्रैक्चर होने के बाद भी, कड़कड़ाती ठंड में टी-शर्ट पहनकर यात्रा को भाजपा ने मुद्दा बनाया। मगर वो बैक फायर कर गया।

चुनावी मोड में भाजपा, टिफिन पर कर रही चर्चा
राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि भाजपा ने 2024 के चुनाव के लिए महा जनसंपर्क अभियान पहले से ही चला रखा है। इसमें जनप्रतिनिधि टिफिन पर चर्चा कर रहे हैं। मेरा बूथ सबसे मजबूत, पन्ना प्रमुखों की बैठक के साथ भाजपा तो पूरे चुनावी मोड में है। 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूरे प्रदेश को साइकिल से मथ डाला था। जिसका असर देखने को भी मिला था कि सपा ने पहली बार अकेले अपने दम पर सरकार बनाई थी।

नरेन्द्र मोदी की केन्द्र में दस साल से सरकार है और राज्य में योगी आदित्यनाथ 6 साल से सत्ता में हैं। विपक्ष को ये लगता है कि अगर बड़े नेता जमीन पर उतरकर जनता से सीधे संवाद करेंगे, तो नतीजे में फेरबदल सम्भव है।

रथ यात्राओं के जरिए जनता से वो अपेक्षित जुड़ाव नहीं बन पाता। कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश में वैसे भी खोने के लिए कुछ भी नहीं है। लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा के बाद भाजपा को राम मंदिर के नाम पर पूरे देश में जिस तरह का जनसमर्थन मिला था। उसके बाद से राजनीति में रोड शो का चलन बढ़ने लगा था। लेकिन, भारत जोड़ो यात्रा के नतीजों ने भारतीय राजनीति में नई ऊर्जा भरी है।

हालांकि, यूपी की बात करें तो गठबंधन राजनीति के असफल प्रयोग और लोकसभा उपचुनावों में अपने गढ़ रामपुर और आजमगढ़ में मिली हार के बाद से सपा काफी निराश है और कार्यकर्ताओं का जोश ठंडा पड़ चुका है। अखिलेश यादव को इस बात का एहसास आजमगढ़ के विधायकों और कार्यकर्ताओं के साथ हुई बैठक में हुआ कि उनका कार्यकर्ता निराश है। यूपी में भारत जोड़ो यात्रा में शूटर दादी प्रकाशी तोमर भी शामिल हुईं थीं।

ये चुनाव के वक्त ही दिखते हैं’, ये कहकर भाजपा अखिलेश को घेरती है। वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखेड़े ने बताया कि 4 चुनाव लगातार हारने के बाद अखिलेश को यह एहसास है कि 2024 उनके राजनीतिक करियर के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

भाजपा उन पर हर वक्त हमलावर रहती है कि वो चुनाव के दौरान ही जनता के बीच दिखाई पड़ते हैं और वो भी भव्य रथ पर…ऐसे में सपा के नेताओं का भी मानना है कि पदयात्रा से बेहतर जनता से जनसंवाद हो ही नहीं सकता।

पदयात्रा के जरिए ही जनता से बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है। पार्टी का मानना है कि हर बात पर राजनीतिक बयानबाजी से बचते हुए काम से जनता के बीच जाएं। अनावश्यक बयानबाजी के चलते, क्योंकि भाजपा अपने हिसाब से ऐसे बयानों को इस्तेमाल कर लेती है।

उत्तर प्रदेश के कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत का कहना है कि भारत जोड़ो यात्रा-2 के रूट पर काम चल रहा है। मगर इतना तय है कि यात्रा प्रदेश में लंबी दूरी तय करेगी, हर हिस्से और तबके को छुएगी। सत्ता और व्यवस्था परिवर्तन के लिए ये यात्रा बहुत क्रांतिकारी होगी।

भाजपा के राष्ट्रवाद के एजेंडा को सभी सियासी दलों ने अपनाया राजनीतिक विश्लेषकों मानना है कि भाजपा के राष्ट्रवाद के एजेंडा को सभी सियासी दलों ने अपना लिया है। सभी दल पॉलिटिकल हथियार के रूप में राष्ट्रवाद के मुद्दे पर अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करना चाहते हैं। किसके राष्ट्रवाद से जनता ज्यादा प्रभावित होती है? किसका प्रयास जनता को ज्यादा लुभा पाता है? इसका पता 2024 के लोकसभा चुनावों के नतीजों से ही चलेगा!

मगर ये बात तय है कि 2024 में राष्ट्रवाद एक बड़ा मुद्दा होगा। साथ ही विपक्षी पार्टियां जनता से जुड़े मुद्दों को किस तरह से रखती हैं। इस पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। महंगाई, बेरोजगारी की समस्या होने के बाद भी, विपक्षी दल इसे मुद्दा बनाने में नाकामयाब रहें हैं.

अखिलेश ने 2014, 2017, 2019 और 2022 में अपनी राजनीति में कई प्रयोग किए मगर हर बार शिकस्त ही झेलनी पड़ी। हार से सबक लेते हुए अखिलेश ये अच्छे से जान चुके हैं कि बिना संगठन के कोई चुनाव नहीं जीता जा सकता है और लोकतंत्र में जनता जनार्दन है, जिसके पास जनसेवक को खुद जाना होता है। यूपी में कांग्रेस के पास खोने जैसा कुछ भी नहीं है।

3 दिन-30 घंटे, यूपी में राहुल की यात्रा के मायने

जाटलैंड से बनाया 2024 चुनाव का रोडमैप, कैराना गए, हिंदू-मुस्लिम पर कोई बात नहीं की.राहुल गांधी की “भारत जोड़ो यात्रा” उत्तर प्रदेश में तीन दिन तक चली। इसमें राहुल गांधी 30 घंटे तक UP में रहे और 120 किमी. पैदल चले।राहुल यहां 3 लोकसभा और 11 विधानसभा सीटों को ध्यान में रखते हुए जनसभाओं को संबोधित करेंगे ताकि INDIA मोर्चा 2024 के लोक सभा के सीटों पर जीत हासिल कर सके और फिर विधान सभा के 11 सीट पर मोर्चा की पकड़ मजबूत हो ताकि फिल्म सिटी नोएडा से यूपी के लोगों को रोजगार मिल सके और फिल्म सिटी का विकास मुंबई फिल्म सिटी के तर्ज पर नोएडा का भी विकास हो।

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