परिवार परामर्श केंद्र में सुलझे 2 प्रकरण
कृष्णकांत सोनी रायसेन
जरा सा झगड़ा हुआ और पत्नी अपने भाई को बुलाकर मायके चली जाती है। मैं बच्चों के बिना नहीं रह पाता हूं। यह कहते हुए पति की आंखें नम हो गईं, और उन्होंने वो सब बयां कर दिया, जो शायद वो मुंह से नहीं कह पा रहा था।
पत्नी के बार-बार मायके चले जाना और कई-कई दिन तक नहीं लौटना, विवाद की वजह तो था। पति-पत्नी से गहरा प्रेम करता था उसके बिना न रह पाने की पीड़ा। जिसे वह खुलकर कह तो नहीं पा रहा था, लेकिन उसकी आंखें सब कुछ कह गईं।
सिर्फ नफरत ही घर टूटने की वजह नहीं है, कई बात मन की बात न कह पाने की पीड़ा भी विवाद की वजह बन जाती है। परिवार परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों को सुनने के बाद उनमें विवाद की कोई बड़ी वजह सामने नहीं आई। घर में होने वाले मामूली झगड़े के बाद पत्नी मायके चली जाती और काफी दिन तक नहीं लौटती।
दोनों को समझाया तो खुशी-खुशी साथ रहने को तैयार हो गए और आगे से अपनी गलतियां न दोहराने व एक दूसरे का ख्याल रखने का वादा किया।
एक अन्य मामले में पति-पत्नी के विवाद में परिजनों में मारपीट हो गई। पति ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी। पति-पत्नी का इस प्रकरण में समझाइश के बाद दोनों साथ रहे राजी हो गए। परिवार परामर्श केंद्र में उन्हें मारपीट के मामले में राजीनामा करने की सलाह दी, जिसमें राजीनामा होने पर पति-पत्नी के विवाद में भी दोनों की आपसी सहमति से राजीनामा कराया गया।
मंगलवार को बैठक में 5 प्रकरण रखे गए थे। दो में राजीनामा व एक प्रकरण में बार-बार नोटिस के बाद भी पति के उपस्थित नहीं होने पर पत्नी की सहमति से प्रकरण दर्ज कराया गया। 2 प्रकरण में आगामी तारीख दी गई है। बैठक में अध्यक्ष कैलाश श्रीवास्तव, सलाहकार अशोक गुप्ता, चेतन राय, अनीता राजपूत, प्रधान आरक्षक लक्ष्मण प्रसाद, आरक्षक लोकेंद्र मौर्य उपस्थित रहे।