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न्यायालय के समक्ष झूठी गवाही देने वाली महिलाआरोपी को तीन वर्ष का सश्रम कारावास की सजा

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–एवं 500 रूपये जुर्माना से दण्डित किया

रायसेन। न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, रायसेन जिला रायसेन द्वारा निर्णय पारित कर आरोपी सुशीलबाई पत्नी रूप सिंह, आयु लगभग 30 वर्ष निवासी मानपुर थाना कोतवाली रायसेन, जिला रायसेन म.प्र. को मिथ्या साक्ष्यी (झूठी गवाही) देने के आरोप में दो‍षसिद्ध पाये जाने पर धारा 193 भा.द.सं. में तीन वर्ष का सश्रम कारावास व 500/- रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।

इस मामले में शासन की ओर से श्रीमती शारदा शाक्य , सहायक जिला अभियोजन अधिकारी, जिला रायसेन ने पैरवी की।

घटना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि, माननीय चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश रायसेन श्रीमती तृप्ति शर्मा द्वारा माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रायसेन को दिनांक 05.07.2016 को लिखित परिवाद प्रेषित कर लेख किया गया कि उनके न्या‍यालय के समक्ष थाना कोतवाली जिला रायसेन के अपराध क्रमांक 287/2016 से उद्भूत सत्र प्रकरण क्रमांक 19000368/2016 विचारण हेतु प्राप्त् हुआ था। विचारण के दौरान इस प्रकरण की अभियोक्त्री द्वारा विचाराधीन प्रकरण में अपने न्यायालयीन कथन में अभियोजन कथा का समर्थन नहीं किया। प्रकरण से संबंधित प्रथम सूचना रिपोर्ट अभियोक्त्री के लिखित आवेदन दिनांक 22.04.2016 के आधार पर दर्ज की गयी थी। उक्तो शिकायत एवं प्रथम सूचना रिपोर्ट पर अभियोक्त्री द्वारा अपने हस्ताक्षर होना स्वीकार किया गया, परंतु शिकायत एवं प्रथम सूचना रिपोर्ट की अंर्तवस्तुओं की सत्यता से इंकार किया गया। अन्वेषण के दौरान अभियोक्त्री के कथन धारा 164 द.प्र.सं. के अंतर्गत दिनांक 03.05.2016 को श्री पी.के. सौंधिया, तत्कालीन जेएमएफसी रायसेन के द्वारा दर्ज किये गये थ, जिसमें अभियोजन कथा का समर्थन करते हुये शपथ पर कथन किया था। दिनांक 04.07.2016 को अभियोक्त्री के द्वारा शपथ पर दी गयी न्यायालयीन साक्ष्य के दौरान अभियोजन कथा का समर्थन नहीं किया, जबकि पूर्व में शपथ पर किये गय धारा 164 द.प्र.सं. के कथनों में अभियोजन प्रकरण का समर्थन किया है। उपरोक्त परिस्थितियों प्रथम दृष्टया यह दर्शित करती है कि अभियोक्त्री द्वारा शपथ पर किये गये उपरोक्त दोनों कथनों में से एक कथन मिथ्या् है, तदनुसार अभियोक्त्री द्वारा उसके साथ बलात्संग की घटना घटित होने अथवा घटित न होने संबंधी कोई एक कथन शपथ पर किया गया मिथ्या कथन है। तत्कालीन माननीय चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा यह पाये जाने पर कि अभियोक्त्री द्वारा न्या‍यालयीन कार्यवाही के दौरान जानबूझकर उपरोक्त‍ मिथ्या साक्ष्य दी गयी है, तो धारा 195 दप्रसं. के प्रावधानों के अनुसार अभियोक्त्री के विरूद्ध धारा 193 भादसं. के अंतर्गत दण्डनीय अपराध के संबंध में संज्ञान लिया जाकर आगे कार्यवाही किये जाने हेतु लिखित परिवाद तात्‍कालीन माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रायसेन से समक्ष प्रस्तुत किया।

न्यूज सोर्स-श्रीमती शारदा शाक्य मीडिया प्रभारी जिला रायसेन

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