स्कूली वाहनों के बीमा, फिटनेस रजिस्ट्रेशन कार्ड (आरसी) और अन्य जरूरी दस्तावेजों की समय पर नहीं होती जांच
रुपेश मेहरा बरेली रायसेन
नगर के शिक्षा संस्थान गुरुकुल स्कूल द्वारा बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जब उन्हीं बच्चों की सुरक्षा की बात आती है तो जिम्मेदारों की लापरवाही सवालों के घेरे में खड़ी नजर आती है।
गुरुकुल स्कूल की बस क्र, MP 38 P 0252 और आइशर ट्रक ट्रक क्र, MP 30 A 8819की भिड़ंत के बाद सूचना मिलते ही थाना प्रभारी कपिल गुप्ता पुलिस बल के साथ घटना स्थल पर पहुंचे और घायल बच्चों को सिविल अस्पताल बरेली पहुंचाया गया।

स्कूल प्रबंधन की लापरवाही
एक बार फिर स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।आरोप हैं कि बस में क्षमता से अधिक बच्चे बैठाए जा रहे थे और स्कूल पहुंचने की जल्दबाजी में ओवरटेक करने के दौरान यह टक्कर हुई। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़
बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूल संचालकों की जवाबदेही कहां?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्कूल संचालकों के लिए बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण समय पर स्कूल पहुंचना है? यदि वाहन में क्षमता से अधिक बच्चे बैठाए जाते हैं और सड़क पर जल्दबाजी में नियमों की अनदेखी होती है, तो यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों की जिंदगी को जोखिम में डालने वाला गंभीर मामला है। नगर के प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को लाने ले जाने वाले वाहनों की से यह चौथी घटना सामने आई है जिससे पलकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भय बना हुआ है।
दस्तावेजों की अनदेखी
स्थानीय स्तर पर स्कूली वाहनों के बीमा, फिटनेस प्रमाणपत्र, पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी), चरित्र प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों की नियमित जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि बिना वैध फिटनेस के वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं, तो परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर किस काम की है?

हादसे के बाद जांच, पहले क्यों नहीं?
अक्सर किसी बड़े हादसे के बाद आरटीओ और संबंधित विभाग जांच की प्रक्रिया शुरू करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि हादसे से पहले ऐसे वाहनों की जांच क्यों नहीं होती? नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूल संचालकों पर समय रहते सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?
बच्चों की सुरक्षा केवल कागजी नियमों और औपचारिक निरीक्षणों से सुनिश्चित नहीं होगी। परिवहन विभाग को स्कूली वाहनों की सघन जांच करानी चाहिए और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई भी करनी चाहिए। बच्चों की जिंदगी की सुरक्षा के लिए परिजनो ने पुलिस और परिवहन विभाग से जांच करते हुए सख्त कार्यवाही करने की बात कहीं है।
कैसे हुआ हादसा और क्या बोले संचालक
घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया जब इस संबंध में स्कूल प्रबंधन से संपर्क किया गया और स्कूल के संचालक प्रशांत राठी से बात की गई तो उन्होंने पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे के बाद ड्राइवर मौके से फरार हो गया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि दुर्घटनाग्रस्त बस को फिलहाल पुलिस थाने में खड़ा करवा दिया गया है प्रशांत राठी का कहना है कि ईश्वर की असीम कृपा से कोई जनहानि नहीं हुई और बच्चों की जान बच गई प्रबंधन की और से इसे एक महज़ हादसा करार दिया जा रहा है लेकिन इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।