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बंदरों के आतंक से तीन गांवों में दहशत, छतों पर जाना हुआ मुश्किल

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एक महीने से दीवानगंज में डेरा, करीब 50-60 बंदरों का झुंड मचा रहा उत्पात

नल-टोंटी, बिजली तार, डिश, बर्तन और कच्चे मकानों की खपरैल तक तोड़ रहे

 मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन 

सांची विकासखंड के दीवानगंज, अंबाड़ी और मुस्काबाद गांवों में इन दिनों बंदरों के बढ़ते आतंक से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। सबसे अधिक परेशानी दीवानगंज में बनी हुई है, जहां ग्रामीणों के अनुसार करीब एक महीने से 50 से 60 बंदरों का झुंड लगातार गांव में डेरा जमाए हुए है। सुबह और शाम होते ही बंदरों के झुंड घरों की छतों, आंगन और खेतों में पहुंचकर जमकर उत्पात मचा रहे हैं। हालात यह हैं कि महिलाएं और बच्चे बंदरों के डर से छतों पर जाने से भी बचने लगे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बंदर केवल छतों और खेतों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि कई बार घरों के अंदर तक घुस जाते हैं। छतों पर रखे नल, टोंटी, डिश, बिजली के तार, बर्तन, चूल्हे, कपड़े और अनाज को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कच्चे मकानों की छतों पर चढ़कर बंदर खपरैल तक फोड़ देते हैं। इससे ग्रामीणों को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों को खदेड़ना भी पड़ रहा भारी

ग्रामीणों के मुताबिक बंदरों को भगाने के लिए जब लोग एकजुट होकर उन्हें खदेड़ने का प्रयास करते हैं तो बंदर कई बार लोगों की ओर झपटने लगते हैं। इससे लोग डरकर वापस अपने घरों में चले जाते हैं। बंदरों के डर के कारण बच्चे घरों से बाहर निकलने में भी घबराने लगे हैं। वहीं महिलाएं छत पर कपड़े सुखाने, सामान रखने या अन्य घरेलू काम के लिए जाने से बच रही हैं।

खेतों में पहुंचकर फसलों को भी नुकसान

बंदरों के झुंड के खेतों में पहुंचने से किसानों की परेशानी भी बढ़ गई है। बंदर खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों को फसल बचाने के लिए खेतों में निगरानी करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह और शाम के समय बंदरों के झुंड अचानक गांव में प्रवेश कर जाते हैं और काफी देर तक अलग-अलग घरों तथा खेतों में उत्पात मचाते रहते हैं।

शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

ग्रामीणों का आरोप है कि बंदरों की समस्या को लेकर जिम्मेदार विभाग को कई बार सूचना दी गई, लेकिन अभी तक बंदरों को पकड़ने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि आसपास के अन्य गांवों में ऐसी समस्या नहीं है, जबकि दीवानगंज में करीब एक महीने से लगातार बंदरों का आतंक बना हुआ है।

ग्रामीण दिनेश साहू, अंशु नायक, दीपक नायक, दीपक साहू, रिया साहू सहित अन्य ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि गांव में टीम भेजकर बंदरों को पकड़ा जाए और उन्हें आबादी क्षेत्र से दूर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो बंदरों के हमले से किसी बच्चे, महिला, बुजुर्ग या अन्य ग्रामीण के साथ गंभीर घटना हो सकती है।

दीवानगंज निवासी मुकेश साहू ने बताया कि काले मुंह के बंदर एक मंजिल से दूसरे मंजिल पर कूदते है। टीन कि चादर पर धमा चौकड़ी के कारण रात में सो नहीं पाते हैं। दिन और रात में आवाज़ आती है वही टावर पर चढ़ी हुई सीमेंट की चद्दर को भी बंदरों ने फोड़ दिया है।

शक्ति नायक, सुरेंद्र नायक, धीरज नायक ने बताया कि पीपल के पेड़ पर एक दर्जन से ज्यादा बंदर रात दिन चिल्लाते रहते हैं पेड़ों की टहनियां तोड़ तोड़ कर नीचे फेंकते रहते हैं। डर के मारे छोटे-छोटे बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं।

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