शरद शर्मा बेगमगंज रायसेन
नगर में कृषि उपज मंडी के सामने सागर रोड़ पर शनिवार की रात करीब 10 बजे एक बाइक सवार घर जा रहे थे कि अचानक उनकी बाइक गड्ढे में गिरने से फिसल गई और वो गंभीर रूप से घायल हो गए। वहां से निकल रहे युवाओं ने उन्हें उठाया और शासकीय सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन वहां कोई अटेंडर नही मिला और ना ही डॉक्टर।
सूत्रों के अनुसार ग्राम सुनेटी निवासी मुन्ना चौबे 65 वर्ष अपनी बाइक से वापिस घर आ रहे थे। गड्ढे में बाइक गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर एवं शरीर में कई जगह चोटें आने से रक्तस्राव बहुत ज्यादा हो रहा था।
तब वहां से गुजर रहे नगर से समाजसेवी युवाओं सोनू राय , महेंद्र मिश्रा , पंकज पटेल , धर्मेंद्र पटेल , फैजान खान एवं सोनू ठाकुर उन्हें गंभीर अवस्था में सड़क पर पड़े देखा। सड़क से गुजरने वाले कोई भी वाहन उनकी मदद के लिए नहीं रुक रहे थे। उक्त युवक अपनी कार में उठाकर उन्हें सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे तो वहां पर कोई अटेंडर नहीं मिला। तब उक्त युवाओं ने स्वंय भागदौड़ शुरू कर दी।वो स्ट्रेचर लेकर आए और उन्हें अंदर लेकर पहुंचे तो ड्यूटी पर कोई डॉक्टर भी नही था। मात्र दो स्टॉफ नर्स ओर एक ड्रेसर मिला।
करीब आधा घण्टे तक डॉक्टर को बुलाने की जुगत में लगे रहे लेकिन जब डॉक्टर नहीं आया तो ड्रेसिंग रूम में ले जाकर ड्रेसर से उनकी मरहम -पट्टी कराई ओर वहां से उन्हें बचाने की जद्दोजहद में लगे युवा एक निजी चिकित्सक के जहां लेकर पहुंचे। तब कहीं जाकर समाजसेवी युवाओं की मेहनत और मशक्कत से गंभीर रूप से घायल मुन्ना चौबे की जान बच पाई।
नागरिकों का आरोप है कि विधायक देवेंद्र पटेल बेगमगंज में ही निवासरत रहते हैं और सिविल अस्पताल उनके निवास के ठीक सामने है और वो स्वंय रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष है उसके बाद भी अस्पताल की दुर्दशा ओर अव्यवस्था से आमजन बहुत ज्यादा परेशान हैं।
इमरजेंसी में रात्रि के समय डॉक्टर ओर अन्य स्टॉफ बहुत कम मिलता है। कई बार इमरजेंसी में हंगामा ओर डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटनाएं हो चुकी है। रोगी कल्याण समिति एवं आउटसोर्सिंग से 50 – 60 कर्मचारियों की भर्ती की गई थी लेकिन इतने सारे कर्मचारी कहां और कब ड्यूटी कर रहे हैं। समझ से परे है।
इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों के परिजनों को स्वंय स्ट्रेचर या व्हीलचेयर घसीटना पड़ रही है। इसके अतिरिक्त सभी भागदौड़ परिजन ही करते देखे जाते हैं। अस्थाई रूप से रखे गए कर्मचारियों की फ़ौज गायब रहती है। उन्हें केवल वेतन वाले दिन भीड़ लगाए देखा जा सकता है।नागरिकों ने मुख्यमंत्री एवं कलेक्टर से सिविल अस्पताल की व्यवस्था सुधारे जाने की मांग की है।