सागर। निर्यापक मुनि श्री अभय सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि “सही दिशा का प्रसाद ही सही दशा का प्रसाद बनता है।” मनुष्य संस्कार और पुरुषार्थ से जीवन में आगे बढ़ता है, लेकिन सफलता के लिए सही दिशा का होना आवश्यक है।
उन्होंने नदी का उदाहरण देते हुए कहा कि नदी अपने उद्गम से समुद्र तक पहुंचने के लक्ष्य के साथ निरंतर आगे बढ़ती है। मार्ग में अनेक बाधाएं आती हैं, फिर भी वह अपना लक्ष्य नहीं छोड़ती। इसी प्रकार मनुष्य को भी जीवन की प्रतिकूल परिस्थितियों में धैर्य और दृढ़ता बनाए रखते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए।
मुनिश्री ने भगवान श्री पारसनाथ के जीवन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि घोर उपसर्गों के बीच भी भगवान अपने आत्मस्वरूप और ध्यान में अडिग रहे। उनकी अचल साधना हमें प्रेरणा देती है कि बाधाएं कितनी भी हों, यदि लक्ष्य पवित्र और दिशा सही हो तो साधक को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। मुनि श्री प्रभात सागर महाराज ने भी इस अवसर पर सगे भाइयों में यदि आपस में बैर है तो आज के दिन दूर करने की प्रेरणा दी।
श्री पार्श्वनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर प्रथम लाडू सुमित जैन साधना जैन सचिन जैन, द्वितीय लाडू आशीष शास्त्री बीना , तृतीय लाडू शीलचंद मनीष जैन, चतुर्थ लाडू पं कमल जैन, सरोज जैन, ब्र नेहा दीदी, पांचवा लाडू, रविंद्र जैन वसंत जैन सीहोरा, ने बोलियों के माध्यम से लेकर भगवान को चढ़ाया। सुबह 8:20 पर भगवान मोक्ष गए। डीएसपी अरविंद जैन,श्रीमती स्वप्निल जैन,अरिहंत जैन ने शास्त्र भेंट, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन किया।
लाडू प्रतियोगिता के पुरस्कार रविवार को वितरित किए जाएंगे
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मुकेश जैन ढाना, देवेंद्र जैना, संतोष बिलहरा, दिनेश बिलहरा, विकास जैन केसली, मुकेश जैन पारस, राजकुमार बरा, मुकेश जैन सेवन, सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे