8 दिन में 3 आत्महत्याएं, दीवानगंज क्षेत्र में बढ़ी चिंता, पोस्टमार्टम सुविधा न होने से ग्रामीणों में आक्रोश
-आत्महत्या को लेकर दीवानगंज पुलिस खासा परेशान
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
दीवानगंज सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले आठ दिनों के भीतर दो युवतियों और एक युवक द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। लगातार तीन युवाओं की असमय मौत से गांवों में शोक और चिंता का माहौल है। तीनों मृतकों की उम्र 18 से 21 वर्ष के बीच बताई गई है। पुलिस ने सभी मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन आत्महत्या के कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो सके हैं। आसपास क्षेत्र में फांसी लगाने से लेकर दुर्घटनाओं यदि पर लगातार इजाफा हो रहा है जिससे आए दिन दीवानगंज पुलिस परेशान है।
सबसे ताजा मामला ग्राम जमुनिया का है, जहां 5 जून की रात 21 वर्षीय रचना लोधी ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जाता है कि घटना से पहले उसने अपने भाई को दुकान भेजा था। भाई के लौटने पर घर का दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी आवाज लगाने के बाद भी जब कोई जवाब नहीं मिला तो अंदर झांककर देखा गया, जहां रचना फंदे पर लटकी मिली। परिजन उसे तत्काल एक निजी क्लीनिक लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही दीवानगंज चौकी प्रभारी सुनील शर्मा मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। घटनास्थल से बाद में एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। रचना लोधी 8 बहन भाइयों में तीसरे नंबर की थी दो बैलों की जबकि शादी हो चुकी है। शनिवार को जिला अस्पताल रायसेन में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। आगे की जांच जा रही है ।
इससे पहले 28 मई को दीवानगंज के गोसाईं मोहल्ले में 19 वर्षीय अभिषेक उर्फ भोला ने अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी थी। युवक की बहन ने उसे कमरे में फंदे पर लटका देखा था। परिजनों के अनुसार घर के सभी सदस्य सो रहे थे और युवक कब छत से उतरकर कमरे में पहुंचा तथा यह कदम उठा लिया, इसकी जानकारी किसी को नहीं लग सकी। परिजन जब सुबह उठे जब पता चला कि अभिषेक ने फांसी लगा ली है। इस मामले में भी आत्महत्या का कारण अभी तक सामने नहीं आया है।
वहीं 31 मई को ग्राम सेमरा में 21 वर्षीय पूजा अहिरवार ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के समय परिवार के सदस्य करीला धाम दर्शन के लिए गए हुए थे और युवती घर पर अकेली थी। फोन कॉल का जवाब नहीं मिलने पर परिजनों ने गांव के एक युवक को घर भेजा, जिसने पूजा को फंदे पर लटका पाया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल रायसेन भेजकर जांच शुरू की थी।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने क्षेत्रवासियों को चिंता में डाल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि आखिर इतनी कम उम्र के युवक-युवतियां आत्महत्या जैसा कदम क्यों उठा रहे हैं, यह गंभीर जांच का विषय है।
पोस्टमार्टम सुविधा नहीं होने से बढ़ी परेशानी
तीनों मामलों में शवों को पोस्टमार्टम के लिए 31 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल रायसेन भेजना पड़ा। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग एक वर्ष पहले तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दीवानगंज में पोस्टमार्टम की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन पिछले एक साल से यहां एक भी पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। क्षेत्र में दीवानगंज और सलामतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद मृतकों के शव रायसेन भेजे जा रहे हैं, जिससे परिजनों को आर्थिक, मानसिक और समय संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से दोनों अस्पतालों में पोस्टमार्टम सुविधा और मर्चुरी रूम की व्यवस्था शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र ही इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र के ग्रामीण जनसुनवाई में आवेदन देने के साथ आंदोलन करने के लिए भी बाध्य होंगे। ग्रामीण कई बरसों से दोनों ही अस्पतालों में मर्चुरी रूम की मांग करते चले आ रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग आंखें बंद कर बैठा है।
पुलिस वर्जन
दीवानगंज क्षेत्र में आए दिन दुर्घटनाएं और आत्महत्याके केस सामने आ रहे हैं। जिसको लेकर पुलिस जांच कर रही है लेकिन पोस्टमार्टम 31 किलोमीटर दूर होने पर परिजन सहित पुलिस प्रशासन भी परेशान हो रहा है जबकि दो अस्पताल दीवानगंज क्षेत्र में ही लगे हुए हैं अगर इन अस्पतालों में पोस्टमार्टम की सुविधा मिलने लगे तो काफी हद तक ग्रामीणों को सुविधा मिलने लगेगी।
सुनील शर्मा दीवानगंज पुलिस चौकी प्रभारी