देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल
बादल फटने की घटना कितनी हृदय विदारक हो सकती है, लोगों ने देखा उत्तरकाशी में जल प्रलय का भयानक वीडियो। बादल फटने पर किस तरह पानी का सैलाब पहाड़ों से आया। होटल–घर कैसे ताश के पत्तों की तरह बिखर गए। दरअसल बादल आकाश में तैरते हुए दिखाई देने वाले पानी के कण या बर्फ होते हैं। जब भाप या वाष्प बनकर पानी के काफी छोटे-छोटे कण वायुमंडल के ऊपरी सतह पर पहुंचकर ठंडी हवाओं के साथ मिलते हैं तो ये बादल कहलाते हैं। ये तो हुई बात बादल की। अब आगे जानते हैं आखिर बादल फटना क्या होता है।जब किसी छोटे से इलाके में बहुत कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होती है तो आमतौर पर इसे हम बादल फटना कहते हैं। इसमें बादल फटने जैसा कुछ नहीं होता। हां, बारिश इतनी तेज गति से होती है कि जैसे ज्यादा पानी से भरी हुई एक बहुत बड़ी पॉलिथीन आसमान में फट गई हो। इसलिए इसे हिंदी में बादल फटना और अंग्रेजी में क्लाउडबर्स्ट के नाम से जाना जाता है। मौसम विभाग के मुताबिक जब अचानक 20 से 30 वर्ग किलोमीटर के इलाके में एक घंटे या उससे कम समय में 100 एमएम या उससे ज्यादा बारिश हो जाए तो इसे बादल फटना कहते हैं।
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