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किसानों को थमा दिया नकली बीज, शिकायत के बाद चेता प्रशासन,बीज विक्रय केंद्र की एक दुकान सील

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– खेतों में जाकर कृषि विभाग के जांच दल ने जांच की
– किसानों ने दर्ज कराई थी शिकायत

-किसानों की शिकायत पर कलेक्टर के निर्देश पर गठित टीम ने की कार्रवाई

रंजीत गुप्ता शिवपुरी

शिवपुरी जिले में इस समय खरीफ सीजन में सोयाबीन सहित अन्य फसलों की बोवनी का काम तेज गति से जारी है। इसी बीच कई किसानों को सोयाबीन एवं अन्य उपज के नकली बीज दिए जाने के कारण मामला गर्मा गया है। किसानों ने इस संबंध में जिला प्रशासन से शिकायत दर्ज कराई थी इसके बाद कृषि विभाग द्वारा एक दल गठित किया गया है जो किसानों की शिकायत के बाद कार्रवाई कर रहा है। इसी बीच गठित दल द्वारा पोहरी विधानसभा क्षेत्र के बैराड़, गाजीगढ़ एवं टोड़ा गांव में किसानों के खेतों में पहुंचकर के यहां पर संबंधित बीज की जांच की गई है और उसे प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। इस कार्रवाई के दौरान गठित दल द्वारा एक बीज की दुकान भी सील की गई है।

बीज दुकान सील, प्रयोगशाला भेजा नमूना-

शिवपुरी जिले की बैराड़ तहसील के कुछ किसानों ने बीते दिनों सोयाबीन बीज के अंकुरण न होने की शिकायत पर जिला प्रशासन से की एवं बीज के नमूनों की जांच करने की गुहार लगाई थी। इसके बाद कलेक्टर रविन्द्र कुमार चौधरी के निर्देश पर जांच दल गठित किया गया। उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास के नेतृत्व में गठित दल नेमैसर्स राजौरिया कृषि सेवा केंद्र बैराड़ का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया विक्रेता बीज अनुज्ञप्तिधारी है तथा उसने अरिहंत एग्रो सीड्स उज्जैन का प्रमाणित लगभग 150 क्विटल सोयाबीन बीज किसानों को विक्रय किया था। बीज भौतिक रूप से सही पाया गया एवं अंकुरण परीक्षण के लिए नमूना प्रयोगशाला भेजा गया है।

खेतों में पहुंचा जांच दल-

उप संचालक कृषि विभाग ने बताया कि शिकायत के आधार पर विक्रेता की दुकान सील की गई है। एक प्रयोगशाला परीक्षण की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। शिकायत की विस्तृत जांच के लिए दल ने गाजीगढ़ एवं टोड़ा गांव में संबंधित किसानों के खेतों क निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गय कि बुवाई के बाद हुई बारिश के कारण सोयाबीन के बीज का अंकुरण प्रभावित हुआ है। कुछ स्थानों पन बीज की अधिक गहराई, जलभराव एवं मिट्टी की ऊपरी सतह कठोर होने जैसे कारण भी सामने आए है। जिन खेतों में मूंगफली एवं बाजरे की फसल बोई गई थी, उनकी स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर पाई गई।

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