मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
इस बार दीवानगंज क्षेत्र में जनवरी के महीने में हुई बरसात के बाद किसानों ने जैसे तैसे गेहूं की फसल की बोवनी तो कर दी और इस समय वह गेहूं की फसल में सिंचाई करने में जुटे हुए हैं, लेकिन किसानों का कहना है कि जिले में बार-बार बदल रहे मौसम के कारण से गेहूं की फसल में जड़ माहू रोग भी घेरने लगा है। इस कारण से किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। दीवानगंज क्षेत्र में इस बार सबसे ज्यादा गेहूं की बोवनी की गई है, लेकिन गेहूं की फसल में जड़ माहू रोग देखा जा रहा है। इससे फसल पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। जड़ माहू रोग का प्रकोप क्षेत्र में अभी से देखा जाना लगा है। कई क्षेत्रों में इस समय गेहूं की फसल की बोवनी भी की जा रही है।
उत्पादन पर पड़ता है प्रभाव
गेहूं की फसल को प्रभावित करने वाले जड माहू कीट, हल्के पीले, भूरे रंग का होता है और यह गेहूं के पौधे की जड़ में पहुंच कर रस चूसता रहता है। धीरे धीरे प्रभावित पौधे पीले पड़ने लगते है। इससे पौधे सूख जाते हैं, वही पौधे की जड़ में पहुंच कर यह कीट रस चूसता है। इससे पौधे कमजोर हो जाते हैं, वहीं गेहूं के पौधे में कंसे कम निकलते हैं। इस कारण से गेहूं की फसल का उत्पादन प्रभावित होता है।
इस संबंध में ग्राम दीवानगंज में रहने वाले किसानो ने बताया कि इस बार बरसात अधिक हुई है। इससे बावजूद जल स्रोतों में पानी की कमी अभी से दिखाई देने लगी है। इधर गेहूं की फसल शुरूआती दौर में ही जडमाहू कीट के कारण से प्रभावित हो रही है। यदि दिसम्बर और जनवरी के महीने में जल स्रोतों में पानी कम हो गया और किसान गेहूं की फसल में आखिरी समय में सिंचाई नहीं कर पाए तो गेहूं की फसल प्रभावित होगी। इससे किसानों की चिंता बढ रही है। हालांकि किसान इस समय खेतों में सिंचाई कर खाद के छिडकाव में जुटे हुए हैं, लेकिन कई जगह गेहूं की फसल पीली पड़ने से भी किसान चिंतित हो रहे हैं।