देवेन्द्र तिवारी सांची रायसेन
सांची की महत्ता को देखते हुए विकास एवं सुंदरता के नाम पर लाखों करोड़ों की भेंट चढ चुकी परन्तु मूलभूत सुविधाएं पाने के लिए भी लोग तरसते दिखाई देते हैं इस नगर मे सारा दिन बिजली जलती हैं रात होते ही बंद हो जाती है संवेदनशील कहे जाने वाले स्तूप रोड पूरी तरह अंधेरे की जकड़ मे रहता है जिससे सुरक्षा को तो पलीता लगता ही है इस रोड से अपने घरों के जाने वाले भी परेशानी उठाते दिखाई देते हैं ।

जानकारी के अनुसार इस नगर की ऐतिहासिकता को देखते हुए सरकारें इस स्थल को सर्वसुविधायुक्त बनाने की कवायद मे लाखों करोड़ों रुपए खर्च करती है परन्तु यह नगर सरकारों की मंशा पर पूरी तरह असफल साबित हुआ है इस नगर मे जिम्मेदारो की लापरवाही के चलते न तो इसके अनुरूप विकास ही हो सका न ही इस स्थल को सुंदरता का जामा ही पहनाया जा सका ।मूलभूत सुविधाओं के नाम पर नगर मे बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमराई दिखाई देती है वैसे तो इस स्थल को देश की सौर ऊर्जा से प्रकाशवान होने वाली पहली सिटी माना जाता है परन्तु जमीनी हकीकत स्वयं अपनी दुर्दशा कहती दिखाई देती है इस स्थल पर दिनभर स्टीट लाइट जगमगाती दिखाई देती ही रात होते ही अंधेरे की जकड़ मे समा जाती है इसका जीता जागता उदाहरण स्तूप रोड पर देखा जाता है जबकि पुरातात्विक ऐतिहासिकता की दृष्टि से स्तूप रोड संवेदनशील क्षेत्र की श्रेणी मे माना जाता है इस मार्ग से होकर ही विश्व ऐतिहासिक स्मारक परिसर जहाँ बेशकीमती असख्य प्रतिमाओं को सुरक्षित संरक्षित कर रखा गया है जिससे इस क्षेत्र की सुरक्षा चौबीस घंटे चौकस रहती है इसके साथ ही इस रोड पर ही पुरातत्व संग्रहालय भी है जहाँ बेशकीमती ऐतिहासिक धरोहर को संजोकर रखा गया है इसके साथ ही इस स्थल पर ही पर्यटन विभाग द्वारा जम्बूद्वीप पार्क के रूप मे विकसित किया गया है जबकि इस पार्क मे बिजली चमकती तो दिखाई देती हैं परन्तु यहां पहुंच मार्ग पूरी तरह रात होते ही अंधेरे की जकड़ मे जकडा जाता हैं हालांकि इस मार्ग से ही होकर नगर के अनेक वार्ड के वार्ड वासियों का आने जाने का एकमात्र मार्ग है इस मार्ग से अपने काम निपटा कर लोगों का देररात तक आना जाना लगा रहता है जिन्हें अंधेरी सडक से होकर गुजरना पडता है जिससे जहरीले कीडे कांटों का भय भी लोगों को सताता रहता है इस बीच किसी मरीजों को अस्पताल पहुंचने के लिये भी अंधेरे से गुजरना पर मजबूर होना पडता है जिससे लोग खासी परेशानी उठाते दिखाई दे जाते हैं रात के अंधेरे कै कारण इस मार्ग पर महिलाओं बच्चों को भी भय सताता रहता है इतना ही नहीं बताया जाता कि अंधेरा रहने के कारण इस मार्ग पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी लगा रहता है तथा अनैतिक गतिविधियों की आशंका भी बढ जाती है इसके साथ ही इस क्षेत्र मे पुरातात्विक धरोहरों के सुरक्षित एवं संरक्षण पर भी सुरक्षा पर सवाल खडे हो जाते हैं रात मे इस मार्ग को रोशन करने न तो पुरातत्व विभाग को ही सुध रही न ही स्थानीय प्रशासन को ही इस मुख्य मार्ग की सुध लेने की फुरसत ही मिल सकी जिससे इस रोड के अंधेरे को दूर किया जा सके ।