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प्रतिदिन योग, रोक सकता है सभी रोग,सांची विश्वविद्यालय में विशेष व्याख्यान का आयोजन

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• पांच मिनट का योग दूर रखे सारे रोग
• नियंत्रित डाइट, डेली एक्सरसाइज़ और अच्छी नींद भी योग है
• अनियंत्रित जीवन शैली से हो रहे हैं गंभीर रोग
• इच्छा पर नियंत्रण ही योग है- प्रो. लाभ
• इच्छा चित्त से पैदा होती है, चित्त पर नियंत्रण योग है- प्रो. लाभ
• कुलपति ने किया काव्य संग्रह ‘तथागत’ का विमोचन
रायसेन।  सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के योग विभाग द्वारा आज “समग्र स्वास्थ के लिए योग” विषय पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। उत्तराखंड के हिमालयन स्कूल ऑफ योग साइंस की सहायक प्राध्यापक डॉ. सोमलता झा ने अपने इस विशिष्ट व्याख्यान में कहा कि किसी भी व्यक्ति की जीवन शैली में अगर गड़बड़ हो रही है तो उसे समझ जाना चाहिए कि शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है और वह बीमार हो रहा है।


उन्होंने कहा कि मात्र सुबह शाम पांच-पांच मिनट योग, प्राणायाम को देकर अपने आप को स्वस्थ रख सकते हैं। खान-पान नियंत्रित कर, छोटी-छोटी दैनिक योग क्रियाओं का अभ्यास कर न कई गंभीर बीमारियों को भी होने से रोका जा सकता है। डॉ. झा ने कहा कि भोजन के 30 मिनट बाद ही पानी पीना चाहिए। उनका कहना था कि नियंत्रित डाइट, एक्सरसाइज़(वॉक, जॉगिंग, योग) और अच्छी नींद होगी तो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता(इम्यूनिटी) अच्छी होगी और वह बीमार नहीं पड़ेगा।
डॉ. सोमलता ने कहा कि समय पर खाना, खाने में गुणवत्तापूर्ण भोजन व कितना खाना स्वस्थ जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हमें भोजन पोषण पाने के लिए करना चाहिए स्वाद पाने के लिए नहीं। ऐसे में योग इंद्रियों पर नियंत्रण सिखा देता है। उन्होंने पतंजलि के सूत्र के माध्यम से बताया कि योग चित्त की वृत्तियों का विरोध है और वर्तमान में लोगों को होने वाली कैंसर व अन्य अधिकतर बीमारियां लाइफ स्टाइल यानी अनियंत्रित जीवन शैली के कारण हो रही हैं। उन्होंने नाणीशोधक प्राणायाम, पित्त प्रकृति को दूर करने के लिए शीत व ऊष्म प्राणायाम, कब्ज़ होने पर कपाल भांति करने की सलाह दी।


विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि गौतम बुद्ध ने कहा है कि सभी प्रकार के दुखों का कारण तृष्णा(कामना या इच्छा) है, यही इच्छा प्रेरित करती है। प्रो. लाभ ने कहा कि तृष्णा चित्त से उत्पन्न होती है और योग के माध्यम से ही चित्त को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बुद्ध के अनुसार मनुष्य का चित्त बंदर की तरह उछलता रहता है और मनुष्य के अंदर यदि 1000 प्रकार की इच्छाएं हैं तो उसके दुख भी 1000 प्रकार के होंगे।


कुलपति प्रो. लाभ ने डॉ. कौशल दुबे के काव्य संग्रह ‘तथागत’ का विमोचन भी किया। डॉ. दुबे जबलपुर के जानकीरमण कॉलेज में प्राध्यापक हैं और उन्होंने दर्शन, साहित्य और इतिहास की पृष्ठभूमि पर इस काव्य संग्रह को रचा है जिसमें बुद्ध के जन्म से लेकर महापरिनिर्वाण तक के सफर को प्रस्तुत किया गया है। तथागत ऐसे बुद्ध को कहा जाता है जो सत्य से अवगत हो। प्रो. लाभ ने कहा कि बुद्ध का चरित्र इतना विराट है कि उसमें राजनीति, धर्म, दर्शन व सर्व समाहित हैं। कुलसचिव प्रो अलकेश चतुर्वेदी ने अतिथि परिचय एवं स्वागत किया।

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